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अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट दूध गुणवत्ता जांच में फेल , क्या आप सुरक्षित हैं ?

Amul

भारत के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले डेयरी ब्रांड्स अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट के दूध को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हाल ही में एक स्वतंत्र लैब Trustified द्वारा किए गए परीक्षण में इन ब्रांड्स के कुछ दूध सैंपलों ने निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं किया, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आधुनिक जीवनशैली में दूध हमारे रोज़मर्रा के आहार का अभिन्न हिस्सा है — चाहे वह सुबह की चाय हो, कॉफी, दलिया या बच्चों का दूध। ऐसे में अगर वही दूध सुरक्षित नहीं रहा तो इसका असर सीधे हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। Trustified ने दूध के Total Plate Count (TPC) और Coliform बैक्टीरिया की मात्रा के लिए विश्लेषण किया, जो यह बताता है कि दूध में रोग फैलाने वाले जीवाणु मौजूद हैं या नहीं।

परीक्षण के नतीजे आश्चर्यजनक रहे। मदर डेयरी के गाय के दूध का Total Plate Count लगभग 2,40,000 CFU/ml पाया गया, जबकि खाद्य सुरक्षा मानक FSSAI के अनुसार यह सीमा 30,000 CFU/ml है — यानी आठ गुना अधिक। वहीं कंट्री डिलाइट के दूध में TPC 60,000 CFU/ml दर्ज किया गया, जो सुरक्षित सीमा से दोगुना अधिक है।

जहां तक अमूल का सवाल है, Taaza और Gold ब्रांड के दूध में Coliform बैक्टीरिया की मात्रा भी FSSAI के निर्धारित स्तर से अधिक पाई गई। Taaza में यह संख्या 980 CFU/ml थी, जबकि Gold में 25 CFU/ml दर्ज की गई। Coliform बैक्टीरिया स्वभाव से हमेशा खतरनाक नहीं होते, लेकिन इनकी उच्च मात्रा यह संकेत देती है कि दूध में अन्य हानिकारक जीवाणु मौजूद हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दूध में बैक्टीरिया का स्तर अधिक है, तो यह उपभोक्ताओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जैसे बच्चे, बुज़ुर्ग और जो लोग पहले से किसी बीमारी से ग्रसित हैं।

ये मुद्दे केवल दूध तक सीमित नहीं हैं। जनवरी 2026 में Trustified ने अमूल दही की जाँच की थी, जिसमें coliform बैक्टीरिया 2,100 गुना और यीस्ट/मोल्ड 60 गुना अधिक पाए गए थे, जो खाद्य सुरक्षा मानकों में स्पष्ट कमी को दर्शाता है।

इन परिणामों के बाद अमूल का कहना है कि उनके उत्पाद FSSAI के मानकों को पूरा करते हैं और उन्होंने जांच रिपोर्टों को खारिज किया है। FSSAI की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे उपभोक्ताओं में चिंता और अनिश्चय बना हुआ है।

भारत में दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद रोज़ाना लाखों घरों में उपयोग किए जाते हैं और इन्हें किसी “प्रीमियम” श्रेणी में नहीं बल्कि सामान्य और सुलभ वस्तु के रूप में देखा जाता है। अमूल जैसे ब्रांड का भारत की आजादी के साथ जुड़ाव और दिलों में एक भावनात्मक स्थान है, इसलिए इनके गुणवत्ता जांच में असफल होना सीधे जिम्मेदारी, पारदर्शिता और खाद्य सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर देता है।

उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दूध और डेयरी उत्पादों को खरीदने से पहले पैकेजिंग, लेबलिंग और तिथि की जांच सावधानीपूर्वक करें। साथ ही, बच्चे और बुज़ुर्गों के लिए उबालकर दूध का सेवन करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा एजेंसियों और निर्माताओं से स्पष्ट जवाबदेही और सुधारात्मक कदम की आवश्यकता अब और अधिक महसूस की जा रही है।

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