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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा होगी

बीजिंग, 11 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने मूल रूप से 2026 की पहली तिमाही में चीन का दौरा करने की योजना बनाई थी। लेकिन ईरान वॉर के बाद से इसको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 11 मई को घोषणा की कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा करेंगे। तो ये उनकी दूसरी चीन यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप 2017 में चीन गए थे, जब उन्हें फॉरबिडन सिटी में स्पेशल टी रिसेप्शन मिला था। तैयारी अंतिम चरण में है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा होगी

बीजिंग, 11 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने मूल रूप से 2026 की पहली तिमाही में चीन का दौरा करने की योजना बनाई थी। लेकिन ईरान वॉर के बाद से इसको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 11 मई को घोषणा की कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा करेंगे। तो ये उनकी दूसरी चीन यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप 2017 में चीन गए थे, जब उन्हें फॉरबिडन सिटी में स्पेशल टी रिसेप्शन मिला था। तैयारी अंतिम चरण में है।

पिछली मीटिंग्स में क्‍या हुआ था?

पिछले साल अक्टूबर 2025 में ट्रंप और शी चिनफिंग ने साउथ कोरिया के बुसान में मुलाकात की थी। वहां ट्रेड ट्रूस हुआ। टैरिफ्स पर एक साल का समझौता। ट्रंप ने चीन को सबसे बड़ा पार्टनर कहा और फैंटास्टिक रिलेशनशिप की बात की। उसी मीटिंग में उन्होंने स्प्रिंग 2026 में चीन आने की प्लानिंग की पुष्टि की। अब ये यात्रा उसी ट्रूस को आगे बढ़ाने और रिश्तों को स्टेबल करने की कोशिश है।

अगर यात्रा सफल रही तो क्‍या होगा असर

ट्रेड पर सबसे बड़ा फायदा होगा। अगर नई डील हुई तो चाइनीज गुड्स पर टैरिफ्स और कम हो सकते हैं। अमेरिकी कंपनियां जैसे ऐपल, टेस्ला को राहत मिलेगी और एक्सपोर्ट बढ़ेगा। चीन के लिए भी एक्सपोर्ट मार्केट मजबूत होगा। सप्लाई चेन स्थिर रहेगी। इन्वेस्टमेंट बढ़ सकता है क्योंकि दोनों तरफ बिजनेस लीडर्स उम्मीद कर रहे हैं।

भविष्य के ट्रेंड्स: रिश्तों की दिशा

रिश्ते ज्यादा स्टेबल और प्रैक्टिकल हो सकते हैं। ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन में चीन का नाम तक नहीं लिया जो टेंशंस कम करने का सिग्नल है। अगर सफल रहा तो ट्रेड एग्रीमेंट्स बढ़ेंगे, रेयर अर्थ्स, टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट कंट्रोल्स पर बात होगी। ग्लोबल इश्यूज जैसे क्लाइमेट चेंज या ईरान वॉर में कोऑपरेशन की गुंजाइश बनेगी।

दुनिया पर असर

दुनिया की दो सबसे बड़ी इकोनॉमीज अगर साथ आईं तो ग्लोबल ग्रोथ को बूस्ट मिलेगा। महंगाई कम होगी। बिजनेस कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। ये यात्रा सिर्फ दो देशों की नहीं, पूरी दुनिया के लिए पॉजिटिव मैसेज होगी। टेंशंस कम करके सहयोग बढ़ाना। इससे उम्मीदें काफी हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

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