अमेरिकी दबाव से ईरान रियायत देने को मजबूर होगा: अमेरिकी डिप्लोमैट माइक वॉल्ट्ज
वाशिंगटन, 10 अगस्त (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज को लगता है कि आर्थिक दबाव ईरान को झुकने पर मजबूर कर देगा। उनका दावा है कि बातचीत की मेज पर रियायतें देने के लिए तेहरान मजबूर हो जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की आर्थिक रणनीति को उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था पर “विनाशकारी प्रभाव” डालने वाला करार दिया।
वॉल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि ईरानी वार्ताकार बातचीत के दौरान बार-बार नकदी और आर्थिक संसाधनों तक पहुंच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान बमबारी का सामना कर सकता है, लेकिन आर्थिक दबाव उसके लिए ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है।
वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान की सबसे बड़ी चिंता उसकी मुद्रा का लगातार कमजोर होना और बढ़ती महंगाई है। उनके मुताबिक, ईरानी नेतृत्व इस समय जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच और नकदी हासिल करने पर ज्यादा जोर दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी का संयुक्त दबाव अंततः ईरान को अपने रुख में बदलाव करने और अमेरिकी शर्तों पर आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकता है।
वॉल्ट्ज ने यह भी दावा किया कि ईरानी नेतृत्व को देश की सेना या आम लोगों की स्थिति की उतनी चिंता नहीं है, जितनी अर्थव्यवस्था के बिगड़ने की है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में ईरानी नेतृत्व रक्षा मंत्री की तुलना में ट्रेजरी सचिव बेसेंट से ज्यादा चिंतित है।
इस बीच डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी का बयान भी सुर्खियों में है। उन्होंने अमेरिका के अंदरूनी हालात पर चिंता जताई है। एनबीसी न्यूज से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति 'यह युद्ध हार चुके हैं' और यह युद्ध जितना लंबा चलेगा, उतना ही अमेरिका को नुकसान होगा।
मर्फी ने कहा कि वह युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए किसी 'खराब समझौते' का भी समर्थन करेंगे। बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो रही है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिकी सीनेटर के मुताबिक इस संघर्ष से अमेरिका हर दिन कमजोर हो रहा है और ईरान उतना ही ताकतवर हो रहा है। कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आम लोग इसकी मार झेल रहे हैं।
--आईएएनएस
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