अमेरिका की कनेक्टिविटी रणनीति में आईएमईसी, ट्रंप के समर्थन के बाद विदेश विभाग ने फिर किया जिक्र
न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (आईएएनएस)। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) को लेकर अमेरिका का समर्थन एक दिन के भीतर दूसरी बार सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गलियारे का समर्थन करने के बाद अब अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इसे उन रणनीतिक आर्थिक गलियारों में शामिल किया है, जिन्हें वाशिंगटन वैश्विक स्तर पर समर्थन दे रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा, "मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ऐसे रास्तों से दूर करने की जरूरत है, जहां ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिम मौजूद हैं। आसपास के देशों में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों ने ऊर्जा की सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत को सामने ला दिया है।" उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन आईएमईसी के साथ-साथ पाइपलाइन और तेल बाहर निकालने के दूसरे विकल्पों का भी समर्थन करता है।
इसके बाद अमेरिका और अर्जेंटीना की ओर से जारी एक संयुक्त तथ्य-पत्र में एंडीज-अटलांटिक कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह परियोजना जी7 की पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट (पीजीII) का हिस्सा है। दस्तावेज में कहा गया है कि यह पहल दुनिया भर में उन रणनीतिक आर्थिक गलियारों के लिए अमेरिकी समर्थन पर आधारित है, जिनका उद्देश्य अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना और अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करना है।
इसी क्रम में अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी), मध्य एशिया और काकेशस में ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट, उप-सहारा अफ्रीका में लोबिटो कॉरिडोर और फिलीपींस में लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर का उल्लेख किया है।
इसका संकेत यह है कि वाशिंगटन आर्थिक गलियारों को केवल परिवहन और व्यापार की परियोजनाओं के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि उन्हें आपूर्ति श्रृंखलाओं, निवेश और रणनीतिक आर्थिक संपर्क को मजबूत करने के साधन के तौर पर भी आगे बढ़ा रहा है।
आईएमईसी भारत के लिए खास महत्व रखता है। इस प्रस्तावित गलियारे का उद्देश्य भारत को अरब प्रायद्वीप के रास्ते यूरोप से जोड़ना है। इसमें समुद्री और रेल संपर्क के साथ ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग पहले भी आईएमईसी को भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार, ऊर्जा और डेटा के प्रवाह को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी पहल बता चुका है।
अमेरिका की ओर से अब इसे अन्य रणनीतिक आर्थिक गलियारों के साथ एक ही सूची में रखना इसके व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण को भी सामने लाता है। वाशिंगटन के अनुसार ऐसे गलियारों के जरिए महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने तथा निजी क्षेत्र के निवेश के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर है।
अमेरिका समर्थित इन पहलों में अफ्रीका का लोबिटो कॉरिडोर भी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य अंगोला के अटलांटिक तट से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जाम्बिया तक रेल, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के जरिए संपर्क मजबूत करना है। अमेरिकी सरकार ने इसके तहत सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश की है।
इसी तरह फिलीपींस का लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर बंदरगाहों, रेल, स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पीजीII के तहत विकसित किए जा रहे प्रमुख आर्थिक गलियारों में शामिल किया है।
ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट मध्य एशिया और काकेशस को वैकल्पिक व्यापार मार्गों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अमेरिकी नीति में इसके तहत परिवहन बुनियादी ढांचे, सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
अमेरिका और अर्जेंटीना के ताजा दस्तावेज में एंडीज-अटलांटिक कॉरिडोर के लिए अमेरिकी सरकारी वित्तीय और तकनीकी सहायता के विकल्पों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक और यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी जैसे संस्थानों के माध्यम से सहयोग की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश और अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
भारत के लिहाज से महत्वपूर्ण बात यह है कि आईएमईसी को इस व्यापक अमेरिकी रणनीति में एक प्रमुख आर्थिक गलियारे के तौर पर दोहराया गया है। ट्रंप के समर्थन के अगले ही दिन विदेश विभाग की ओर से इसका उल्लेख यह दिखाता है कि यह पहल वाशिंगटन के रणनीतिक कनेक्टिविटी एजेंडे में बनी हुई है।
--आईएएनएस
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