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अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म, बाघेई बोले- हम दबाव में नहीं बनाते नीतियां

अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म, बाघेई बोले- हम दबाव में नहीं बनाते नीतियां
अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म, बाघेई बोले- हम दबाव में नहीं बनाते नीतियां

तेहरान, 17 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जो 60 दिनों का समझौता हुआ था, वो खत्म हो गया है। ऐसे में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि जिस हिसाब से अमेरिका ने बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया है, उसके बाद कोई भी चर्चा बेकार है।

ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा 18 जून के मेमोरेंडम का बड़ा और बड़े पैमाने पर उल्लंघन किए जाने की वजह से, तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई बातचीत शुरू नहीं हुई। इसकी वजह से 60 दिन की डेडलाइन की चर्चा बेमतलब हो गई।

ईरान वायर के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाघेई ने अमेरिकी-ईरान ज्ञापन में 60 दिन की कड़ी समयसीमा की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ज्ञापन में 60 दिन की समयसीमा का कोई जिक्र नहीं है और इस्लामी गणराज्य ईरान कभी भी दबाव, अल्टीमेटम या समय की पाबंदी के तहत अपनी नीतियां नहीं बनाता।”

बाघेई के अनुसार, ज्ञापन में केवल 60 दिन की अवधि का जिक्र था ताकि दो मुख्य बिंदुओं, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु मुद्दे, पर चर्चा की जा सके। यदि कोई नतीजा नहीं निकला तो अवधि को बढ़ाया जा सकता है।

ईरान वायर के अनुसार, प्रवक्ता ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी नए मध्यस्थ की भागीदारी के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर अपनी मध्यस्थता जारी रखे हुए हैं। कुछ यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय संपर्कों के दौरान कहा है कि अगर ईरान और अमेरिका चाहें तो हम बातचीत कराने में मदद को तैयार हैं, लेकिन इसका मतलब किसी नए मध्यस्थ को स्वीकार करना नहीं है।

बाघेई ने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य रुकावट मध्यस्थों की कमी नहीं है, बल्कि वाशिंगटन की सोच, गलत अंदाजा और ऐसी रणनीति पर जोर है, जो पहले विफल हो चुकी हैं।

इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ईरान में फ्रांस के दूतावास के दो स्टाफ मेंबर को दोबारा आने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। फ्रांस के विदेश मंत्री के बयानों का जिक्र करते हुए बाघेई ने दावा किया कि ऐसे कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करना डिप्लोमैटिक कानून में गलत है।

उन्होंने कहा कि दूतावास के स्टाफ से ईरानी सिविल सोसाइटी की मदद करने पर जोर देना डिप्लोमैटिक संबंध पर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करने की साफ मंजूरी है। दरअसल, फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने अपने बयान में इन लोगों को ईरानी सिविल सोसाइटी की मदद करने वाले दूतावास का कर्मचारी बताया था।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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