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अमेरिका और भारत के बीच होने वाले डील के विरोध में करेंगे प्रदर्शन : गुरनाम सिंह चढ़ूनी

चंडीगढ़, 20 जून (आईएएनएस)। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भारत और अमेरिका के बीच होने वाले डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम इसके विरोध में आगामी 23 तारीख को विरोध प्रदर्शन करेंगे।
अमेरिका और भारत के बीच होने वाले डील के विरोध में करेंगे प्रदर्शन : गुरनाम सिंह चढ़ूनी

चंडीगढ़, 20 जून (आईएएनएस)। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भारत और अमेरिका के बीच होने वाले डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम इसके विरोध में आगामी 23 तारीख को विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में इस डील को असमानता का पूरक बताते हुए कहा कि अमेरिका के पास भारत से सात गुना ज्यादा रकबा है और चार गुना कम आबादी है। उसके पास पर्याप्त मात्रा से भी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में हम उनकी शर्तों को मानें कि भारत उसके आयात पर टैक्स लगा सकता है और न ही उसकी सीमा निर्धारित कर सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिका की ओर से सारा उत्पाद भारत में बेचा जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि ऐसी स्थिति में भारत की खेती बर्बाद होगी और किसान भाई अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर होंगे। कंपनी की ओर से जमीनों को खरीदा जाएगा। इसके बाद कंपनियां खाने वाले को ब्लैक करेगी। दूसरा भारत से जीएम वाले भी फैसलें आएंगी। उससे भारत में किस तरह की बीमारियां फैलेंगी, इस पर अभी क्या ही टिप्पणी करें। इतना साफ है कि इससे हम आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ जाएंगे। पहले हम ब्रिटेन के गुलाम थे और आने वाले समय में हम अमेरिका के गुलाम हो जाएंगे। लिहाजा हमें पूरी स्थिति पर अंकुश लगाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आगामी 23 जून को इस पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। इसके विरोध में हम काले झंडे लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 23 तारीख को सभी संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई। चंडीगढ़ के किसान भवन में हम फैसला करेंगे कि बड़ा आंदोलन कैसे करना है। हमने संबंधित सभी मंत्रालयों, प्रधानमंत्री, कृषि मंत्रालय सहित अमेरिका दूतावास को पत्र लिख दिया है। हमने साफ कर दिया है कि इस डील को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।

साथ ही, उन्होंने कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हम जरूरत पड़ी, तो हम उससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे। कृषि कानूनों के तहत यह प्रावधान किया गया था कि पूरे कृषि व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपा जाए। अब जिस तरह की व्यवस्था की जा रही है, उसके तहत पूरे कृषि क्षेत्र का ही निजीकरण किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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