अमरावती लोगों के विश्वास, त्याग और बेहतर भविष्य के सपने की कहानी हैः राममोहन नायडू
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि यह सिर्फ एक राजधानी बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह लोगों के विश्वास, त्याग और एक बेहतर भविष्य के सपने की कहानी है। इस संबंध में गुरुवार को राज्यसभा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू इस विधेयक पर आयोजित चर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक क्षण पर बोलने का अवसर देने के लिए वह आभारी हैं।
किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा, “यह सिर्फ मेरे लिए या आंध्र प्रदेश के 5 करोड़ लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में रहने वाले पूरे तेलुगु समाज के लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ दिन है। मेरे लिए यह एक बहुत ही भावुक पल है। यह विषय केवल एक राज्य की राजधानी तय करने का नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के लोकतंत्र, नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था पर लोगों के विश्वास और गर्व को भी दर्शाता है। इसका प्रभाव बहुत गहरा है।”
उन्होंने कहा, "अगर हम इतिहास देखें तो आंध्र प्रदेश देश के सबसे समृद्ध और प्रगतिशील राज्यों में से एक रहा है, लेकिन जब 2024 में राज्य का विभाजन हुआ तो पहली बार ऐसा हुआ कि एक नया राज्य तो बना, लेकिन उसके पास अपनी राजधानी नहीं थी। यही से समस्याएं शुरू हुईं। हम विभाजन के खिलाफ नहीं थे, लेकिन जिस तरीके से यह हुआ, वह गलत था। पहले भी देश में नए राज्य बने हैं, लेकिन तब ऐसी कोई परेशानी नहीं हुई। आंध्र प्रदेश को 16,000 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे के साथ बिना राजधानी के छोड़ दिया गया। उस समय पूरे राज्य के लोगों को भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में सभी लोगों की उम्मीद एक नेता पर टिकी थी, वह थे, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू। उन्होंने लोगों में विश्वास और एक नई सोच पैदा की। उनका मानना था कि हर संकट एक अवसर लेकर आता है। उन्होंने कहा कि मैं खुद बहुत कम उम्र में राजनीति में आया और पिछले 10 वर्षों से संसद में हूं। इस दौरान मैंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की हर बात को समझा और हर मंच पर उसे उठाया। इसलिए आज यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि आंध्र प्रदेश के लोगों, खासकर अमरावती के किसानों और महिलाओं के प्रयासों को मान्यता मिल रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब राजधानी चुनने की बात आई, तो लोकतांत्रिक तरीके से सभी दलों की सहमति से अमरावती को राजधानी चुना गया। यह निर्णय 2024 में विधानसभा में लिया गया था। अमरावती कृष्णा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे एक आदर्श स्थान बनाता है। दुनिया की कई महान सभ्यताएं नदियों के किनारे विकसित हुई हैं, और उसी सोच के साथ एक विश्वस्तरीय राजधानी बनाने का सपना देखा गया। अमरावती का इतिहास भी बहुत पुराना है। लगभग 2000 साल पहले सातवाहन काल में यह एक प्रमुख केंद्र था और बौद्ध धर्म का भी महत्वपूर्ण स्थल रहा है। राज्य के सभी हिस्सों से इसकी दूरी लगभग समान है, इसलिए इसे सर्वसम्मति से चुना गया। दशहरा के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री ने खुद आकर इसकी नींव रखी।
उन्होंने कहा कि पूरे देश का समर्थन इस परियोजना के साथ था और निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन 2019 में राज्य सरकार बदलने के बाद स्थिति बदल गई। 2019 से 2024 तक का समय आंध्र प्रदेश के लिए बहुत कठिन रहा। विकास रुक गया और राज्य पीछे चला गया। अमरावती को खत्म करने की कोशिश की गई और तीन राजधानियों का प्रस्ताव लाकर भ्रम पैदा किया। इससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी टकराव पैदा करने की कोशिश हुई। बाद में यह प्रस्ताव न्यायिक जांच के बाद वापस लेना पड़ा और 2022 में हाई कोर्ट ने भी कहा कि अमरावती ही राजधानी रहेगी। इस पूरे विषय में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अमरावती के किसानों और महिलाओं की रही। जब राजधानी के लिए जमीन की जरूरत पड़ी, तो किसानों ने स्वेच्छा से हजारों एकड़ जमीन दे दी। यह बहुत बड़ा और प्रेरणादायक योगदान है।
--आईएएनएस
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