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अक्षय कुमार के शो में पहुंचे गुजराती ब्लॉकबस्टर 'लालो' के सितारे, शेयर की फिल्म के पीछे की कहानी

मुंबई, 16 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फिल्मों के साथ-साथ क्विज रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' में सक्रिय हैं। उनके शो में गुजराती फिल्म 'लालो-कृष्ण सदा सहायते' की टीम ने स्पेशल गेस्ट के तौर पर शिरकत की है।
अक्षय कुमार के शो में पहुंचे गुजराती ब्लॉकबस्टर 'लालो' के सितारे, शेयर की फिल्म के पीछे की कहानी

मुंबई, 16 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फिल्मों के साथ-साथ क्विज रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' में सक्रिय हैं। उनके शो में गुजराती फिल्म 'लालो-कृष्ण सदा सहायते' की टीम ने स्पेशल गेस्ट के तौर पर शिरकत की है।

'लालो' गुजराती सिनेमा की पहली ऐसी फिल्म बनी है, जिसने बॉक्स ऑफिस में शानदार कमाई कर इतिहास रच दिया है। इसका हिंदी डब संस्करण 9 जनवरी 2026 को रिलीज हुआ और दिलचस्प बात ये है कि यह फिल्म एक ही कैमरे से शूट की गई है। इसके गाने काफी भावपूर्ण हैं, जिन्हें हिंदी में भी डब किया गया है।

इस एपिसोड में अक्षय ने फिल्म के निर्देशक अंकित सखिया और कलाकारों श्रुहद गोस्वामी, रीवा रच, और करण जोशी समेत पूरी टीम मस्ती करते नजर आए। वहीं, शो की शुरुआत में अक्षय ने बांसुरी बजाकर माहौल को और भी ज्यादा खास बनाया।

अक्षय ने शो में बताया कि तीन दोस्तों, अंकित सखिया और उनके साथियों ने इस फिल्म को बनाने का सपना देखा था। उन्होंने कहा, "फिल्म बनाने के लिए अंकित और उनके साथियों के पास सिर्फ एक-दूसरे पर भरोसा था। उन्होंने एक दोस्त से कैमरा उधार लिया, दोस्तों को ही एक्टिंग करने को कहा और एक ही जगह पर पूरी फिल्म शूट कर डाली। सिर्फ 40 दिनों में शूटिंग पूरी हुई। टीम में करीब 15 प्रोड्यूसर थे, ज्यादातर कॉलेज के दोस्त। जब पैसे की कमी होती, तो ये दोस्त अपनी जमा-पूंजी से मदद करते थे।"

अक्षय ने इस दोस्ती को 'अद्भुत' बताया और कहा कि यह फिल्म दोस्ती को समर्पित एक खूबसूरत तोहफा है। शो में निर्देशक अंकित ने भावुक होकर बताया कि वे और उनकी टीम हर सुबह थिएटर जाते थे। उन्होंने कहा, "हम हर सुबह थिएटर के बाहर जाते थे और लोगों से फिल्म को लेकर पूछते थे, तो वे फिल्म को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया देते थे। कुछ दर्शकों को कहानी इतनी भावुक लगती थी कि फिल्म को देखते हुए उनकी आंखों से आंसू आ जाते थे, लेकिन इसके बावजूद सिनेमाघरों में सीटें खाली रहती थीं। यह देखकर हमारी टीम का दिल टूट जाता था। हम समझ नहीं पा रहे थे कि इतनी अच्छी फिल्म होने के बावजूद लोग क्यों नहीं आ रहे।"

तभी अक्षय ने बीच में आकर बताया कि अंकित ने इसके बाद कितना बड़ा त्याग किया। उन्होंने कहा, "ये लोगों को पैसे देते थे कि जाओ मेरी फिल्म देखो। ये लो, मैं टिकट देता हूं। अगर अच्छी लगे तो जाकर अपने दोस्तों को बताना।"

इस कहानी से अपना गहरा निजी जुड़ाव महसूस करते हुए, अक्षय ने अंकित से पूछा कि एक छोटे से बजट वाली फिल्म को 100 करोड़ की सफल फिल्म बनाने के इस मुश्किल सफर से उन्होंने क्या सीखा।

अंकित ने जवाब दिया, "मैंने एक ही बात सीखी कि अगर कुछ करना है, तो घर से बाहर निकलना होगा।"

उन्होंने फिल्म की सफलता का श्रेय दोस्तों को दिया। उन्होंने कहा, "दोस्तों के साथ और भगवान कृष्ण की कृपा से यह संभव हुआ।"

अंकित ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि यह फिल्म अपने आप में दोस्ती को समर्पित एक तोहफा है, और इस तरह फिल्म के पीछे की असल जिंदगी की कहानी का एक खूबसूरत चक्र पूरा हो जाता है।

--आईएएनएस

एनएस/एएस

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