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अखिलेश यादव ने पहली बार विदेशी निवेशकों को लाने की बात कही थी : आशुतोष वर्मा

लखनऊ, 26 फरवरी (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए एनसीईआरटी को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। इसके साथ ही अखिलेश यादव और पूर्व की सपा सरकार की तारीफ की है।
अखिलेश यादव ने पहली बार विदेशी निवेशकों को लाने की बात कही थी : आशुतोष वर्मा

लखनऊ, 26 फरवरी (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए एनसीईआरटी को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। इसके साथ ही अखिलेश यादव और पूर्व की सपा सरकार की तारीफ की है।

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी विकास को नहीं समझती और जब समझती है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है। अखिलेश यादव ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने इस देश में पहली बार किसी राज्य में विदेशी निवेशकों को लाने की बात कही थी। अखिलेश यादव की सरकार के दौरान ही लखनऊ में एचसीएल, सैमसंग और अमूल जैसे बड़े कारखाने स्थापित हुए थे। अखिलेश यादव ने ही 2012 में बच्चों को लैपटॉप देकर हाई एजुकेशन और भविष्य के लिए तैयार किया। सपा सरकार ने ही लखनऊ में मेट्रो चलवाई। विजनरी लीडर को समझने में देर लग सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी को समझ आ गया है कि विजन इंडिया कहीं है तो अखिलेश के नाम पर है।"

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, "एनसीईआरटी मामले में जो कुछ भी हुआ है और न्यायपालिका के बारे में जो कुछ लिखा गया, वह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं एक बात कहना चाहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट जिस तरह से स्वतः संज्ञान लेकर मामलों में त्वरित कार्रवाई करता है, क्या वह अन्य मामलों में भी उतनी ही तत्परता दिखाता है? आज हमारे न्यायालयों में हजारों-लाखों मामले लंबित हैं, जिनकी तारीखें बार-बार बढ़ाई जा रही हैं।"

बता दें कि एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक उल्लेखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच की बात कही है और इससे एक दिन पहले ही किताब के खास चैप्टर पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि अदालत को बदनाम नहीं करने दिया जाएगा, हालांकि कोर्ट की आपत्ति के बाद एनसीईआरटी ने किताब फिर लिखने का फैसला किया है।

--आईएएनएस

ओपी/एबीएम

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