अगर अखिलेश यादव यदुवंशी हैं तो कृष्ण जन्मभूमि के लिए आवाज उठाएं: संजय निषाद
लखनऊ, 28 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने अयोध्या और कृष्ण जन्मभूमि को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच जारी बयानबाजी, राहुल गांधी के कथित गुमशुदगी पोस्टर विवाद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार की देश के बंटवारे पर की गई टिप्पणी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए भाजपा की विचारधारा का बचाव किया।
संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर आवाज उठाता है तो पहले उसे उस आस्था और विचारधारा से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के बयान का हम समर्थन करते हैं। अगर आप किसी विषय पर आवाज उठा रहे हैं तो पहले आस्था लाइए, दर्शन करिए और उस विचारधारा से जुड़िए। जब आप उस विचारधारा से जुड़े ही नहीं हैं तो उस पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। यदि वे (अखिलेश यादव) स्वयं को यदुवंशी मानते हैं तो उन्हें सबसे पहले मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें कई बार सुझाव दिया है कि अगर वे यदुवंशी हैं तो सबसे पहले मथुरा की आवाज उठाएं। अब मथुरा की बारी है। उन्हें इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए, साथ देना चाहिए और वहां बैठक करनी चाहिए। भारतीय संस्कृति की विचारधारा के साथ खड़े होकर अपनी यदुवंशी विरासत की लड़ाई लड़नी चाहिए।
अखिलेश यादव द्वारा भाजपा की नजर डोनेशन पर होने संबंधी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि एक विचारधारा की पार्टी है। पार्टी की विचारधारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी विकास की मुख्यधारा में लाने की है। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े यदि कुछ लोग दोषी पाए गए हैं तो वे जेल जा रहे हैं। लेकिन दो-चार दोषियों को आधार बनाकर पूरी पार्टी पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। जो दोषी होंगे, वे कानून के अनुसार जेल जाएंगे। इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।"
राहुल गांधी को लेकर सामने आए कथित गुमशुदगी पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग विदेशी ताकतों के राजनीतिक स्पीकर बन गए हैं। अगर वे वास्तव में भारत की जनता के प्रतिनिधि होते तो जनता के साथ खड़े रहते, उनकी आवाज बनते और पिछड़ों, दलितों, शोषितों तथा वंचितों के अधिकारों की बात करते, लेकिन आज वे ऐसे समय में जनता के बीच से लापता हो जाते हैं।
संजय निषाद ने देश के बंटवारे को लेकर आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के लोग सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं और विभाजन का दर्द आज भी महसूस किया जाता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग भी हमारे ही थे। धर्म बदल गया, लेकिन आज वहां की स्थिति देखिए। वहां न खाने की व्यवस्था है, न शिक्षा और न रोजगार। वहां त्राहि-त्राहि मची हुई है। ऐसे में दर्द होना स्वाभाविक है। देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर इतिहास के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की आजादी में योगदान देने वाले क्रांतिकारियों को हमेशा सम्मान और स्मरण में रखा जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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