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नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स बोले- 'मैं एआई को नहीं ह्यूमन इंटेलिजेंस को तरजीह देता हूं'

नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स बोले- 'मैं एआई को नहीं ह्यूमन इंटेलिजेंस को तरजीह देता हूं'
नोबेल विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स बोले- 'मैं एआई को नहीं ह्यूमन इंटेलिजेंस को तरजीह देता हूं'

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दखल से सचेत रहने की सलाह नोबेल पुरस्कार विजेता रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स ने दी है। उन्होंने कहा कृत्रिम बुद्धिमता की बजाए ह्यूमन इंटेलिजेंस पर भरोसा करना ज्यादा सही है। ईएसटीआईसी 2026 में बतौर स्पीकर हिस्सा ले रहे वैज्ञानिक ने आईएएनएस से खास बातचीत में अपनी राय व्यक्त की।

1993 फिजियोलॉजी/ मेडिसिन विषय में नोबेल से सम्मानित रॉबर्ट्स के अनुसार एआई को लेकर सावधानी बरतने की खास जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमें बहुत सावधान रहना होगा। व्यक्तिगत रूप से, मैं ह्यूमन इंटेलिजेंस को तरजीह देता हूं।"

उन्होंने मौजूदा एआई मॉडल्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे अपना बेसिक डेटासेट और निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया नहीं बताते, जो वैज्ञानिक पद्धति के बिल्कुल खिलाफ है। उन्होंने कहा, "विज्ञान का आधार ही है धारणाओं से शुरू होता है और फिर किस तरीके से परिणाम तक पहुंचे ये बताया जाता है। एआई अक्सर बेकार डेटा पर ट्रेन होने की वजह से हैलुसिनेशन (भ्रम) पैदा करता है। लेकिन अगर इसे सही से प्रशिक्षित किया जाए और यह अपनी प्रक्रिया बताए, तो विज्ञान के लिए बहुत अच्छा साबित होगा।"

भारत के विज्ञान में योगदान और ग्लोबल साउथ के पावर सेंटर के रूप में उभरने पर रॉबर्ट्स ने कहा कि भारत में फर्स्ट-क्लास वैज्ञानिक हैं।

उन्होंने कहा, "अब वैज्ञानिकों को देश से बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि अमेरिका जाना आसान नहीं और यूरोप भी वैज्ञानिकों को लेने का इच्छुक नहीं है, इसलिए ट्रेनिंग एक समस्या है। लेकिन मैं इसकी चिंता नहीं करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि आप यह सब खुद कर सकते हैं। आप में इतना दम खम है कि आप दुनिया को भाड़ में जाने के लिए कह सकते हैं।"

अपनी स्प्लिट जीन की खोज, जिसने आणविक जीव विज्ञान की समझ बदल दी थी, के तीन दशक बाद भी जेनेटिक्स में सबसे बड़े अनसुलझे सवाल पर उन्होंने कहा कि अब भी सैकड़ों जीन ऐसे हैं जिनका काम हमें पता नहीं है।

उन्होंने कहा, "ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया पर हम दशकों से काम कर रहे हैं, फिर भी उसमें 400-500 ऐसे जीन हैं जिनका काम हमें नहीं पता। आज के जमाने में यह भयावह है कि हमने उनका काम पता करने में समय नहीं लगाया। यही हाल मानव जीनोम का भी है, जहां बहुत से जीन के कार्य अब भी अज्ञात हैं।"

बता दें कि, ईएसटीआईसी का मतलब इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव से है। यह भारत का एक प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच है। 27 अक्टूबर को से 29 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में इसका आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम में 12 सेक्टरों पर चर्चा की जााएगी।

--आईएएनएस

केआर/

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