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आपकी Instagram फोटो से AI बना सकता है हूबहू चेहरा! Meta के नए फीचर ने बढ़ाई प्राइवेसी की चिंता, जानिए कैसे करें बंद

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही यूजर्स की निजता को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। Meta के नए AI इमेज फीचर 'Muse' को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर यूजर्स की Instagram तस्वीरों और प्रोफाइल से प्रेरित होकर AI-जनरेटेड इमेज तैयार कर सकता है। इसने लाखों सोशल मीडिया यूजर्स को अपनी डिजिटल प्राइवेसी को लेकर सतर्क कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, Meta का नया AI सिस्टम यूजर्स के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंटेंट, प्रोफाइल तस्वीरों और साझा की गई इमेज के आधार पर उनके जैसी दिखने वाली AI तस्वीरें तैयार करने में सक्षम है। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह फीचर उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने और रचनात्मक कंटेंट तैयार करने के लिए विकसित किया गया है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे डिजिटल पहचान और निजी डेटा की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मान रहे हैं।

टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि AI मॉडल बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर किसी व्यक्ति की शैली, चेहरे की विशेषताओं और विजुअल पैटर्न को समझ सकते हैं। यदि किसी प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक तस्वीरों तक पहुंच मिलती है, तो AI उनके आधार पर नई इमेज तैयार कर सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि AI बिल्कुल वास्तविक फोटो की कॉपी बना देता है, बल्कि वह उपलब्ध जानकारी के आधार पर नई तस्वीरें तैयार करता है।

इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल उनकी स्पष्ट अनुमति के बिना AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जाना चाहिए। डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ उपयोगकर्ताओं की सहमति और डेटा सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta ने अपने प्लेटफॉर्म पर AI से जुड़े कई प्राइवेसी विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। यूजर्स अपनी Privacy Settings और AI Preferences में जाकर यह नियंत्रित कर सकते हैं कि उनका सार्वजनिक डेटा AI फीचर्स के लिए किस हद तक उपयोग किया जा सके। यदि किसी क्षेत्र में यह विकल्प उपलब्ध है, तो उपयोगकर्ता संबंधित सेटिंग्स में जाकर AI डेटा उपयोग से जुड़ी प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया अकाउंट को अधिक सुरक्षित रखने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां भी अपनानी चाहिए। जैसे—प्रोफाइल को सार्वजनिक (Public) की बजाय निजी (Private) रखना, केवल विश्वसनीय लोगों के साथ तस्वीरें साझा करना, नियमित रूप से प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करना और प्लेटफॉर्म की नई नीतियों को समय-समय पर पढ़ना।

Meta का कहना है कि वह AI तकनीक को जिम्मेदारी के साथ विकसित कर रहा है और उपयोगकर्ताओं को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण देने के लिए लगातार नए विकल्प जोड़ रहा है। कंपनी यह भी कहती है कि विभिन्न देशों में लागू डेटा सुरक्षा नियमों के अनुरूप AI फीचर्स संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग देशों में उपलब्ध सुविधाएं और नियंत्रण विकल्प अलग हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक आने वाले वर्षों में सोशल मीडिया का अहम हिस्सा बनने वाली है। ऐसे में उपयोगकर्ताओं के लिए यह समझना जरूरी होगा कि उनके द्वारा साझा किया गया कंटेंट भविष्य में किन-किन तकनीकों के लिए उपयोग किया जा सकता है। डिजिटल जागरूकता और सही प्राइवेसी सेटिंग्स ही ऐसे संभावित जोखिमों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।

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