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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मोहम्मद तनवीर की फांसी पर लगाई रोक, 56 लोगों की हुई थी मौत

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मोहम्मद तनवीर की फांसी पर लगाई रोक, 56 लोगों की हुई थी मौत

सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में दोषी मोहम्मद तनवीर की मौत की सजा पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने तनवीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी फांसी की सजा पर फिलहाल अमल रोकने का आदेश दिया। तनवीर ने गुजरात हाईकोर्ट के 7 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल थे। अदालत ने मामले के मूल रिकॉर्ड ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट से मंगाने का निर्देश भी दिया है। यह रोक फिलहाल मोहम्मद तनवीर की मौत की सजा पर है; इससे उसकी दोषसिद्धि या सजा के खिलाफ अपील पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

जेल में आचरण और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर तनवीर से संबंधित प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट पेश करे। इसके अलावा, जेल अधीक्षक को तनवीर के जेल में किए गए काम, आचरण और व्यवहार के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

अदालत ने जेल प्रशासन को सरकारी अस्पताल से तनवीर का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने और उसकी रिपोर्ट भी आठ सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों और मामले के रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद शीर्ष अदालत आगे सुनवाई करेगी। मामले को लगभग 12 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी बरकरार रखी थी

गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी।

दोषियों ने विशेष अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी अपीलें खारिज करते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। इसके बाद कुछ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

26 जुलाई 2008 को हुए थे 21 बम धमाके

26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस घटना ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद से निपटने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मामले की जांच के दौरान अहमदाबाद में हुए धमाकों के साथ सूरत में बरामद बिना फटे बमों से जुड़े मामलों को भी जोड़ा गया। विशेष अदालत में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला, जिनमें से 49 को दोषी ठहराया गया था।

एक अन्य दोषी की फांसी पर भी रोक

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट इससे पहले दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की मौत की सजा पर भी रोक लगा चुका है। अदालत अब संबंधित दोषियों की याचिकाओं और सजा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है।

मोहम्मद तनवीर के मामले में फिलहाल फांसी पर रोक लागू रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान जेल में आचरण, प्रोबेशन और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन से जुड़ी रिपोर्टों के साथ मामले के रिकॉर्ड पर भी विचार किया जाएगा।

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