BRICS समिट से पहले दिल्ली में गरमाया तिब्बत का मुद्दा: शी जिनपिंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, चीन पर बड़ा हमला
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले दिल्ली में तिब्बत का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मजनू का टीला इलाके में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में चीन की नीतियों के खिलाफ पोस्टर और बैनर थे।
प्रदर्शनकारियों ने चीन की नीतियों का विरोध करते हुए ‘एथनिक यूनिटी लॉ एंड प्रोग्रेस’ कानून को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने तिब्बत के राजनीतिक कैदियों की रिहाई और तिब्बती लोगों को अपनी संस्कृति, भाषा और धार्मिक पहचान के साथ जीने का अधिकार देने की मांग उठाई।
‘शी जिनपिंग के सामने अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं’
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं और ऐसे समय में वे अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। तिब्बती समुदाय ने चीन की सरकार पर तिब्बत में लंबे समय से दमन करने का आरोप लगाया।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य चीन के शासन का विरोध करना और तिब्बत की आजादी की मांग को सामने रखना है। उन्होंने नए कानून को वापस लेने और तिब्बत में बंद राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की भी मांग की।
चीन से बिना शर्त बातचीत की मांग
तिब्बती समुदाय ने चीन से 14वें दलाई लामा और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत शुरू करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बातचीत के जरिए तिब्बत के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने भारत के नेताओं से भी तिब्बत के मुद्दे पर समर्थन देने की अपील की।
‘तिब्बती पार्लियामेंट-इन-एक्साइल’ के सदस्य वांगड्यू दोरजी ने कहा कि उनका प्रदर्शन BRICS बैठक के दौरान शी जिनपिंग के भारत आने के विरोध में है। उन्होंने कहा कि तिब्बती समुदाय चीनी राष्ट्रपति का स्वागत नहीं करता और तिब्बत का मुद्दा भारत की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
नए ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ का विरोध क्यों?
तिब्बती समुदाय चीन के नए ‘एथनिक यूनिटी लॉ एंड प्रोग्रेस’ को लेकर भी चिंतित है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कानून के जरिए अलग-अलग जातीय समुदायों को एक व्यापक राष्ट्रीय पहचान में शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
आलोचकों को आशंका है कि इससे तिब्बती समुदाय की अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है। भाषा, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को लेकर भी समुदाय ने चिंता जताई है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने भी तिब्बती समुदाय से चीन में हो रहे बदलावों पर नजर रखने की अपील की है और नए कानून को लेकर चिंता जताई है।
तिब्बती समुदाय ने कहा- सम्मान और बातचीत से ही आएगी शांति
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वास्तविक शांति दबाव या दमन से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी सम्मान से आ सकती है। उनका कहना है कि तिब्बती लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।
शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन तिब्बत के मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक और कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में ले आया है।

