'अहंकार के बजाय विनम्रता और निरंतर सीखने का भाव रखना चाहिए', पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अहंकार के बजाय विनम्रता और निरंतर सीखने का संदेश देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया।
पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, "खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते शशी। उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमाः।।" शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि आकाश में चमकता हुआ जुगनू चंद्रमा के अभाव में ही कुछ समय तक चमकता दिखाई देता है। लेकिन सूर्य के उदित होते ही न जुगनू का प्रकाश दिखाई देता है और न ही चंद्रमा का। इसी प्रकार, छोटी उपलब्धि का प्रभाव तभी तक रहता है, जब तक उससे श्रेष्ठ उपलब्धि सामने नहीं आती। इसलिए अहंकार के बजाय विनम्रता और निरंतर सीखने का भाव रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक संस्कृत सुभाषित है, जो मुख्य रूप से संस्कृत के प्रसिद्ध सुभाषित संग्रह 'सुभाषितरत्नभांडागारम्' (सूर्यान्योक्ति अध्याय) में संकलित है। इसके अलावा इसे विभिन्न संस्कृत लोकोक्ति और सुभाषित कोशों में भी उद्धृत किया गया है।
इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि जुगनू तभी चमकता है, जब तक कि चंद्रमा का उदय नहीं होता। लेकिन, जब हजारों किरणों वाले सूर्य का उदय होता है तो न तो जुगनू का प्रकाश दिखाई देता है और न ही चंद्रमा का प्रकाश दिखाई देता है।
इसका भावार्थ है कि जब तक कोई श्रेष्ठ या अधिक प्रतिभाशाली व्यक्ति न हो, तब तक छोटा या कम ज्ञानी व्यक्ति ही श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन, सूर्य के महान प्रकाश के सामने चंद्रमा या जुगनू का तेज फीका पड़ जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इस पोस्ट के माध्यम से संदेश दिया गया है कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। उसे हमेशा विनम्र रहना चाहिए और निरंतर सीखते रहना चाहिए। सूर्य के प्रकाश के माध्यम से बताने की कोशिश की गई है कि जुगनू का प्रकाश तभी तक दिखाई देता है, जब तक कि चंद्रमा का प्रकाश न दिखने लगे। ऐसे ही चंद्रमा का प्रकाश तभी तक दिखाई देता है, जब तक कि सूर्योदय न हो जाए।
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