आगरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का युवाओं को संदेश, शिक्षा को राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम बनाएं
आगरा, 3 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के 92वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का साधन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने नवाचार, अनुसंधान, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जीवन में आत्मसात करने की अपील की।
समारोह में कुल 79,832 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 64 मेधावी विद्यार्थियों को 88 पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 46 पदक छात्राओं और 18 पदक छात्रों को मिले। राज्यपाल ने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि माता-पिता कठिन परिस्थितियों में परिश्रम कर बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाते हैं, इसलिए उनकी मेहनत और त्याग का सम्मान करना प्रत्येक विद्यार्थी का दायित्व है।
उन्होंने युवाओं से सत्यनिष्ठा, अनुशासन, सेवा-भाव और सकारात्मक सोच को जीवन का आधार बनाने की अपील की। दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने आगरा और इटावा के लिए आंगनबाड़ी किट वितरित कीं तथा किशोरियों के एचपीवी टीकाकरण अभियान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 71 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा चुका है और यह अभियान लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक दायित्व से जुड़ी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि शोध कार्यों को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने सितंबर में प्रस्तावित 'एआई मंथन' के सफल आयोजन के निर्देश दिए तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और विचारों पर संगोष्ठी, वाद-विवाद और शोध गतिविधियां आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, 'वेस्ट टू वेल्थ', 'वोकल फॉर लोकल', 'एक जनपद-एक उत्पाद' और मिलेट्स जैसे अभियानों से जुड़ने की अपील की।
साथ ही उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष, रक्षा, विज्ञान और खेलों में देश की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करने, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार में तेजी लाने तथा संबद्ध महाविद्यालयों में चिन्हित कमियों को समयबद्ध ढंग से दूर करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया। समारोह में पश्चिम बंगाल के पारंपरिक शिल्पकार अर्धेंदु शेखर दास को प्राकृतिक सामग्री आधारित हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उत्कृष्ट शिक्षकों, खिलाड़ियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा एचपीवी जागरूकता अभियान से जुड़े लोगों को भी सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया तथा शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा को संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का आह्वान किया। वहीं, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग और आजीवन सीखने की संस्कृति को अपनाने पर बल दिया।
--आईएएनएस
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