आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पूर्व चीफ यार्ड मास्टर दोषी करार, रिश्वतखोरी मामले में 4 साल की सजा
गाजियाबाद, 23 मार्च (आईएएनएस)। गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के तत्कालीन चीफ यार्ड मास्टर रफी अहमद को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई की ओर से जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस प्रकरण में 4 जुलाई 2015 को मामला दर्ज किया था। आरोप था कि रफी अहमद ने एक ठेकेदार से 30 हजार रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की थी। यह रिश्वत उस जुर्माने को कम करने के बदले मांगी गई थी, जो ठेकेदार पर ट्रेन में गार्ड्स लाइन बॉक्स के लोडिंग और अनलोडिंग के कार्य को संतोषजनक ढंग से न करने के कारण लगाया गया था।
इस मामले में शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने ट्रैप बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी को उस समय पकड़ा गया, जब वह शिकायतकर्ता से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए स्वीकार कर रहा था। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 24 नवंबर 2015 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद, लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और उसे चार साल की सजा सुनाई।
इससे पहले, सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को 2003 के 55 लाख रुपए के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) घोटाले के मामले में आठ अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, कुल 2.85 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। देहरादून में सीबीआई अदालत ने पूर्व अधिकारियों दीपक कुमार वर्मा (एलडीसी), मदन पाल (मेट), मनी राम (बेलदार), सुरेंद्र कुमार कौशिक (ड्राइवर), कासिम (सेवानिवृत्त बेलदार), सुखपाल सिंह (यूडीसी), छत्तर सिंह (रोलर ड्राइवर) और पालू दास (सहायक कोषाधिकारी, ट्रेजरी हरिद्वार) को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को दो साल के कठोर कारावास और कुल जुर्माने की सजा सुनाई थी।
--आईएएनएस
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