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अगरतला में ईडी की बड़ी कार्रवाई, गांजा तस्करी से जुड़ी 2.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क

अगरतला, 27 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अगरतला सब-जोनल कार्यालय ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पीएमएलए के तहत बिशु कुमार त्रिपुरा, कामिनी देबबर्मा और बिकाश देबबर्मा की लगभग 2.21 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
अगरतला में ईडी की बड़ी कार्रवाई, गांजा तस्करी से जुड़ी 2.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क

अगरतला, 27 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अगरतला सब-जोनल कार्यालय ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पीएमएलए के तहत बिशु कुमार त्रिपुरा, कामिनी देबबर्मा और बिकाश देबबर्मा की लगभग 2.21 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

ईडी के अनुसार, यह संपत्तियां त्रिपुरा राज्य से बड़े पैमाने पर गांजा (कैनबिस) की तस्करी से अर्जित अवैध आय से खरीदी गई थीं, जिसे बाद में विभिन्न बैंक खातों और अन्य माध्यमों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।

इस मामले में जांच की शुरुआत तब हुई जब त्रिपुरा पुलिस ने बिशु कुमार त्रिपुरा और उसके सहयोगियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कीं। इनमें मेलाघर पुलिस स्टेशन का मामला शामिल है, जिसमें 243 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त किया गया था, तथा विशालगढ़ पुलिस स्टेशन का मामला, जिसमें 3,390 किलोग्राम सूखा गांजा बरामद किया गया।

इन मामलों के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की और आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान ईडी के अधिकारियों ने बिशु कुमार त्रिपुरा के आवास से 66 किलोग्राम गांजा भी बरामद किया, जिसके बाद मेलाघर पुलिस स्टेशन में एक अलग एफआईआर दर्ज की गई। ये सभी मूल अपराध नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं।

ईडी की जांच में यह सामने आया कि बिशु कुमार त्रिपुरा और कामिनी देबबर्मा गांजा तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। यह प्रतिबंधित पदार्थ त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले से खरीदा जाता था और बाद में पश्चिम बंगाल, बिहार सहित अन्य राज्यों में तस्करी कर बेचा जाता था। इस अवैध कारोबार से अर्जित धन मुख्य रूप से नकद में हवाला या हुंडी चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया जाता था, जिसे बाद में आरोपियों और उनके परिजनों के बैंक खातों में जमा कराया जाता था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने उसे अचल संपत्तियों, वाहनों, ईंट भट्ठा व्यवसाय और कोलकाता स्थित एक फ्लैट में निवेश किया। इसके साथ ही फर्जी बैलेंस शीट तैयार कर आय और व्यय के झूठे आंकड़े दिखाए गए, ताकि अवैध कमाई को वैध व्यापारिक आय के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। मामले में सहयोगी बिकाश देबबर्मा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने जानबूझकर अपने बैंक खातों का उपयोग इस अवैध धन के लेन-देन और ट्रांसफर के लिए होने दिया, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सका।

फिलहाल ईडी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, और आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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