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29 साल बाद फिर दिखा 'गॉडजिला अल नीनो' का खतरा, NASA ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े, वीडियो में जाने भारत समेत कई देशों पर सूखा-बाढ़ का संकट

29 साल बाद फिर दिखा 'गॉडजिला अल नीनो' का खतरा, NASA ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े, वीडियो में जाने भारत समेत कई देशों पर सूखा-बाढ़ का संकट

भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों पर एक बार फिर मौसम का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियां 29 साल पहले आए शक्तिशाली "गॉडजिला अल नीनो" जैसी दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के ताजा आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी प्रशांत महासागर में समुद्र के भीतर भारी मात्रा में गर्मी जमा हो रही है, जो आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) द्वारा जारी किए गए सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि जून 2026 में समुद्र की सतह और गहराई में तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लगातार मजबूत होती रही तो दुनिया को एक बार फिर बेहद शक्तिशाली अल नीनो का सामना करना पड़ सकता है।

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके कारण दुनिया भर में मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ आती है तो कहीं लंबे समय तक सूखे की स्थिति बन जाती है।भारत में अल नीनो का असर विशेष रूप से मानसून पर पड़ता है। मजबूत अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे खेती और जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

1997-98 का 'गॉडजिला अल नीनो' क्यों था खास?

वैज्ञानिक 1997-98 में आए अल नीनो को अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक मानते हैं। इसे "सुपर अल नीनो" या "गॉडजिला अल नीनो" भी कहा जाता है। उस समय दुनिया के कई हिस्सों में विनाशकारी बाढ़, भीषण सूखा, जंगलों में आग और रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की गई थी।इस घटना के कारण एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के कई क्षेत्रों में कृषि को भारी नुकसान पहुंचा था। लाखों लोग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए थे और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा था।

भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि मौजूदा अल नीनो और अधिक मजबूत होता है तो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में मौसम की चरम घटनाएं बढ़ सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि अन्य इलाकों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।कृषि क्षेत्र पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने की आशंका है। बारिश के असमान वितरण से फसलों को नुकसान हो सकता है और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है। साथ ही गर्मी की लहरें भी अधिक तीव्र हो सकती हैं।

NASA के सैटेलाइट से मिले संकेत

NASA के सैटेलाइट अवलोकनों में प्रशांत महासागर में बड़ी मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा जमा होती दिखाई दे रही है। वैज्ञानिक इस गर्मी को अल नीनो के विकास का प्रमुख संकेत मानते हैं। विशेषज्ञ लगातार समुद्री तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं ताकि इसके संभावित प्रभावों का सटीक अनुमान लगाया जा सके।हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट होगी, लेकिन वर्तमान संकेत बताते हैं कि दुनिया एक बार फिर शक्तिशाली अल नीनो की ओर बढ़ रही है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक मौसम, कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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