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अच्छी बात है कि राजनीति में महिलाओं को स्वीकार करने की तैयारी है : अंजू बॉबी

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। लंबी कूद की पूर्व खिलाड़ी और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अंजू बॉबी जॉर्ज ने महिला आरक्षण बिल के लिए नए सिरे से हो रही कोशिश का स्वागत किया है। उन्होंने इसे नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। इसके साथ ही खेल जगत के लिए इसके संभावित फायदों पर भी चर्चा की।
अच्छी बात है कि राजनीति में महिलाओं को स्वीकार करने की तैयारी है : अंजू बॉबी

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। लंबी कूद की पूर्व खिलाड़ी और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अंजू बॉबी जॉर्ज ने महिला आरक्षण बिल के लिए नए सिरे से हो रही कोशिश का स्वागत किया है। उन्होंने इसे नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। इसके साथ ही खेल जगत के लिए इसके संभावित फायदों पर भी चर्चा की।

अंजू बॉबी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब केंद्र सरकार ने संसद के मौजूदा बजट सत्र को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। इसका मकसद 2029 के आम चुनाव से लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज करना है।

इस घटनाक्रम पर बात करते हुए अंजू ने जोर देकर कहा कि यह कदम महिलाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व की भूमिकाओं में उनकी भागीदारी को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के अनुरूप है।

अंजू बॉबी जॉर्ज ने आईएएनएस से ​​कहा, "यह अच्छी बात है कि महिलाओं को भी आरक्षण मिल रहा है। हम हमेशा महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं, लेकिन यह अच्छी बात है कि राजनीति में भी वे महिलाओं को स्वीकार करने को तैयार हैं। कम से कम 33 फीसदी तो जरूर।"

उन्होंने यह भी बताया कि खेल समेत अलग-अलग क्षेत्रों से ज्यादा लोगों के आने से नीति-निर्माताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिल सकती है। उचित प्रतिनिधित्व के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विधायी निकायों में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी से यह सुनिश्चित होगा कि उनकी चिंताओं को ज्यादा असरदार तरीके से सुना जाए।

उन्होंने कहा, "अगर कोई खेल जगत से आकर हमारा प्रतिनिधित्व करता है, तो हमारे लिए अधिकारियों से जुड़ना आसान हो जाता है और वे खेल जगत के लिए भी कुछ अच्छा कर सकते हैं। वे ही तो नीति-निर्माता होते हैं। इसी कारण अगर हमारा प्रतिनिधित्व उचित संख्या में होगा, तो हमारी आवाज भी सुनी जाएगी।"

केंद्र सरकार के प्रस्ताव में ऐसे तरीकों पर विचार करना शामिल है, जैसे कि संसद और विधानसभाओं में सीटों की कुल संख्या बढ़ाना, ताकि मौजूदा प्रतिनिधित्व पर कोई असर डाले बिना आरक्षण लागू किया जा सके। इसके साथ ही इसमें सीटों के परिसीमन (सीमा-निर्धारण) से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का भी प्रावधान है।

सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को पहले जनगणना पूरी होने और सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया था। इस नए कदम का मकसद बिल को लागू करने की समय-सीमा को तेज करना है, जिसके लिए सरकार राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।

--आईएएनएस

एसएम/एबीएम

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