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अभिषेक बनर्जी पर हमले को भाजपा नेताओं ने बताया न्यूटन का तीसरा नियम और कर्म का फल

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के कई नेताओं ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य में बढ़ते जनाक्रोश का परिणाम बताया, हालांकि उन्होंने हिंसा का समर्थन करने से भी इनकार किया।
अभिषेक बनर्जी पर हमले को भाजपा नेताओं ने बताया न्यूटन का तीसरा नियम और कर्म का फल

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के कई नेताओं ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य में बढ़ते जनाक्रोश का परिणाम बताया, हालांकि उन्होंने हिंसा का समर्थन करने से भी इनकार किया।

भाजपा विधायक उमेश राय ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने न्यूटन के तीसरे नियम का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट, काले झंडे दिखाने, अपमान करने और 'गो बैक' जैसे नारे लगाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने में टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रही है। आज परिस्थितियां बदल गई हैं और जनता उसी माहौल से सीखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रही है।

भाजपा विधायक संजय सिंह ने कहा कि इसे हमला कहें या जनता के गुस्से का प्रदर्शन, लेकिन यह स्थानीय लोगों में मौजूद नाराजगी का परिणाम है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं और भारतीय जनता पार्टी किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती।

भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने दावा किया कि जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत पहुंची थीं, तब लोगों और वकीलों द्वारा 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए थे।

उन्होंने कहा कि अब अभिषेक बनर्जी के साथ भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां उन पर अंडे और चप्पल फेंके गए। यह दर्शाता है कि जनता के भीतर टीएमसी नेतृत्व को लेकर कितना गुस्सा है।

भाजपा नेता और प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल की जनता ने टीएमसी शासन के दौरान कई तरह के अत्याचार देखे हैं और अब उसी का जवाब मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह कर्म का फल है। कीया घोष ने अभया कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय महिलाओं को लगा था कि राज्य में उनके सम्मान और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। इसी कारण महिलाएं सड़कों पर उतरी थीं। उन्होंने यह भी कहा कि आज 26 हजार शिक्षक भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं, लखनऊ में भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि किसी के अत्याचारों के बावजूद कानून को हाथ में लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन के दौरान आम लोगों, माताओं और बहनों पर अत्याचार हुए हैं और कई लोगों की जान भी गई है। इसी वजह से जनता में नाराजगी बढ़ी है, लेकिन इसका समाधान हिंसा नहीं हो सकता।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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