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अभिजीत दिपके के बयान पर राम कदम का पलटवार, 'क्या यह बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं?'

अभिजीत दिपके के बयान पर राम कदम का पलटवार, 'क्या यह बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं?'
अभिजीत दिपके के बयान पर राम कदम का पलटवार, 'क्या यह बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं?'

मुंबई, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में भाजपा नेता राम कदम ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के बयान और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर निशाना साधा।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि अभिजीत दिपके हों या चुनाव आयोग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप करने वाले लोग, ये सारे झूठ बोलने वाले लोगों की टोली है। अब इस टोली का हिस्सा ठाकरे बंधु भी बन रहे हैं। अभिजीत दिपके ने कहा कि पूर्व पीएम नेहरू ने वोटिंग का अधिकार दिया, संविधान नेहरू ने दिया? कौन सा भ्रम आप लोगों के मन में फैला रहे हो? क्या यह परमपूज्य डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं है? भरी सभा में आप कह रहे हैं कि नेहरू ने हमें अधिकार दिया है। नेहरू का संविधान से क्या संबंध है?

उन्होंने कहा कि वहां पर शरजील इमाम और उमर खालिद, जो दिल्ली दंगों के आरोपी हैं और जिन पर मां भारती के खिलाफ कई तरह की अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप हैं, ऐसे लोगों की जयकार हो रही है और वहां उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता मौजूद हैं। क्या पितृ पक्ष में उनकी ओर से यही स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि है। विपक्ष के पास कोई सबूत नहीं है और बिना प्रमाण के आरोप लगाए जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले संविधान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई थी और यह उसी की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि एसआईआर से मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है। लेकिन, विपक्ष फर्जी वोटरों के नामों को जोड़ने के लिए विरोध कर रहा है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान, 'अगर धर्म संकट में है तो देश को भी नुकसान होगा,' पर राम कदम ने कहा कि उनके बयान को व्यापकता से लेने की आवश्यकता है। जब हम कहते हैं कि यह देश केवल कोई भौगोलिक नक्शा नहीं है, तो देश में रहने वाले लोगों से ही देश बनता है। स्वाभाविक तौर पर जब धर्म संकट में है, तो जो लोग जिस देश में रह रहे हैं, वह देश भी संकट में है। इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि 'सबका साथ, सबका विकास' प्रधानमंत्री मोदी का मूल मंत्र है। कुछ विपक्षी नेता कुछ धर्मों के लोगों को गुमराह करके अप्रत्यक्ष रूप से आवाज उठाने का दुस्साहस कर रहे हैं।

मराठी भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा दिया गया। इसके दो साल पूर्ण होने पर राम कदम ने कहा कि हर प्रांत की एक भाषा होती है। जैसे मुंबई और महाराष्ट्र की भाषा मराठी है। बरसों से मांग रही थी कि इस भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिले। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में इसे अभिजात मराठी भाषा का दर्जा दिलाया। स्वाभाविक रूप से संस्कृत के बाद यह एक ऐसी भाषा है, जिसकी मिठास कुछ और ही है।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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