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अभी भी मौका है स्वामी प्रसाद मौर्य सुधर जाएं : अखिल भारतीय हिंदू महासभा

अभी भी मौका है स्वामी प्रसाद मौर्य सुधर जाएं : अखिल भारतीय हिंदू महासभा
अभी भी मौका है स्वामी प्रसाद मौर्य सुधर जाएं : अखिल भारतीय हिंदू महासभा

आगरा, 27 जून (आईएएनएस)। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रमुख अवतार सिंह गिल ने स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से भगवान पर अशोभनीय टिप्पणी करने को लेकर आलोचना की। इस दौरान लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध भी किया।

उन्होंने शनिवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य के शाब्दिक अर्थ की बात करें, तो स्वामी का मतलब भगवान का रूप होता है और प्रसाद का मतलब मंदिर में मिलने वाले प्रसाद से होता है। लेकिन, अफसोस की बात है कि इस व्यक्ति की हरकत ऐसी हो चुकी है कि इसे जितने भी जूते मारो, कम ही हैं। लेकिन, इसे समझ में नहीं आता है।

उन्होंने कहा कि ये व्यक्ति हमेशा से मंदिर और गुरूद्वारों के बारे में अशोभनीय टिप्पणी करता हुआ आया है। मगर स्वामी प्रसाद मौर्य पहले खुद क्या थे, इस बारे में भी पता होना चाहिए। मैं कुल मिलाकर यही कहूंगा कि स्वामी प्रसाद मौर्य के पास समय है, जितनी जल्दी हो सके, उसे सुधर जाना चाहिए। लेकिन, अफसोस की बात है कि उसकी हरकतों से ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा है, उसकी स्थिति सुधरने वाली है।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रमुख अवतार गिल ने कहा कि अभी भी स्वामी प्रसाद मौर्य के पास समय है कि वो सुधर जाएं, अन्यथा उसके साथ ऐसी हरकत की जाएगी कि उसके आने वाली सात पीढ़ी भी याद रखेगी।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा महिला अध्यक्ष मीरा राठौड़ ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य की आलोचना की। उनके मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य का दिमागी संतुलन खो चुका है। वो हमेशा हमारे भगवान राम के बारे में कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं। गौर करने वाली बात है कि वो कभी मस्जिद-मजार के बारे में नहीं बोलते हैं। श्रीराम के बारे में बोला, फिर हनुमान के बारे में बोला। ऐसी स्थिति में जो भी मौर्य की जीभ काटकर लाएगा, उसे पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। यह एक बार गूंगा हो जाएगा, तो फिर कुछ भी नहीं बोल पाएगा।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा महानगर अध्यक्ष निशा ठाकुर ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य पागल हो चुके हैं। उन्हें जल्द से जल्द पागल खाने में भर्ती कराना होगा। जब तक ये ठीक नहीं हो जाए, तब तक इसे पागल खाने से नहीं छोड़ा जाए।

--आईएएनएस

एसएचके/एबीएम

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