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आरोपियों के वकील की दलील-संसद में इस्तेमाल येलो स्मोक कनस्तर खतरनाक वस्तु नहीं, जमानत पर मई में होगी सुनवाई

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। संसद की सुरक्षा चूक मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टल गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मई में होने की संभावना है। अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से रखे, जिसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख तय करने का फैसला किया।
आरोपियों के वकील की दलील-संसद में इस्तेमाल येलो स्मोक कनस्तर खतरनाक वस्तु नहीं, जमानत पर मई में होगी सुनवाई

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। संसद की सुरक्षा चूक मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टल गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मई में होने की संभावना है। अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से रखे, जिसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख तय करने का फैसला किया।

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मामले में ट्रायल कोर्ट में जल्द ही आरोप तय (चार्ज फ्रेम) होने वाले हैं, इसलिए जमानत याचिका पर सुनवाई उसी के बाद की जानी चाहिए। जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वे लंबे समय से जेल में हैं और उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक कृत्य साबित नहीं हुआ है।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि जिस ‘येलो स्मोक’ कनस्तर का इस्तेमाल किया गया, वह कोई खतरनाक वस्तु नहीं है। उनके अनुसार इस तरह के स्मोक कनस्तर का उपयोग जन्मदिन पार्टियों और इंडियन प्रीमियर लीग जैसे आयोजनों में भी किया जाता है।

दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने अदालत में आरोपियों के खिलाफ गंभीर साजिश का मामला बताया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ललित झा ने घटना से जुड़े सभी आरोपियों के मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे ताकि सबूत मिटाए जा सकें। पुलिस ने यह भी कहा कि यह एक गहरी और सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका थी और ललित झा इस साजिश से जुड़ी सभी पांच बैठकों में शामिल रहा था।

अदालत ने भी इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि साजिश में शामिल आरोपियों द्वारा अपने-अपने मोबाइल फोन नष्ट करना एक गंभीर पहलू है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के कृत्य जांच को प्रभावित करने की कोशिश माने जा सकते हैं।

फिलहाल, मामले में अंतिम निर्णय अगली सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा, जब अदालत सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करेगी।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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