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आपसी टकराव से बचे संत समाज और शासन, एकजुटता से ही बचेगा सनातन धर्म और मजबूत होगा लोकतंत्र: बाबा रामदेव

हरिद्वार, 26 जनवरी (आईएएनएस)। बाबा रामदेव ने दावा किया है कि समस्त विश्व में कई ऐसी शक्तियां हैं, जो सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम सभी लोग अपने देश में एकजुटता के साथ रहें। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय से जुड़ा व्यक्ति क्यों न हो। हमें जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर विभाजित नहीं होना है।
आपसी टकराव से बचे संत समाज और शासन, एकजुटता से ही बचेगा सनातन धर्म और मजबूत होगा लोकतंत्र: बाबा रामदेव

हरिद्वार, 26 जनवरी (आईएएनएस)। बाबा रामदेव ने दावा किया है कि समस्त विश्व में कई ऐसी शक्तियां हैं, जो सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम सभी लोग अपने देश में एकजुटता के साथ रहें। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय से जुड़ा व्यक्ति क्यों न हो। हमें जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर विभाजित नहीं होना है।

बाबा रामदेव ने कहा कि शासन हो या संत समाज, हमें एक बात का ध्यान रखना है कि आपस में नहीं उलझना है। अगर हम आपस में उलझेंगे, तो आगे चलकर हमारे स्थिति काफी विकट हो जाएगी। हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि हिंदू विरोधी शक्तियां मौजूदा समय में सक्रिय हैं। अगर हम आपस में ही लड़ेंगे, तो स्थिति हमारे लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। ये लोग सनातन को वायरस बताते हैं और देश को तोड़ने की कोशिश करते हैं।

बाबा रामदेव ने कहा कि भारत में रह रहे विभिन्न धर्मों के लोगों, चाहे वो हिंदू हों या मुस्लिम, सिख हों या ईसाई, हमें एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि हमारे पूर्वज एक ही हैं। ऐसी स्थिति में जब हम एकजुट होकर रहेंगे, तभी आगे चलकर देश में विकास की गति को तीव्र कर पाएंगे। इस बीच, अगर किसी से भूल हुई है तो उसे बड़ा दिल दिखाते हुए माफी मांगनी चाहिए। किसी के बारे में भी गलत बात बोलना ठीक नहीं है। इस तरह की स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, उन्होंने उन सभी लोगों को बधाई दी जिन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण के सम्मान से पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने यह भी मांग की कि किसी संन्यासी को भी इस तरह का सम्मान दिया जाना चाहिए। हम लोग इतने गए-गुजरे नहीं हैं।

वहीं, उन्होंने ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसा आमतौर पर देखने को मिलता है कि जब किसी राजनीतिक दल को चुनाव में अपेक्षित जीत नहीं मिल पाती है, तो ये लोग अविलंब ईवीएम पर सवाल खड़े करना शुरू कर देते हैं, जबकि एक लोकतांत्रिक प्रणाली में इस तरह की स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सभी लोगों को जनता का निर्णय सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ही मजबूत होते हैं। हमें एक दूसरे पर आरोप लगाने से बचना चाहिए। आरोप लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, जो लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। दूसरे पर दोष लगाना आसान होता है, जबकि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। जब तक आप शक्तिशाली नहीं बनेंगे, तब तक आप उभर नहीं पाओगे।

उन्होंने कहा कि गोमाता को राष्ट्रमाता नहीं, बल्कि विश्व माता घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह काम कैसे होगा। अब हमें यह सोचना होगा कि गोमाता को कैसे बचाना है। हमें इस दिशा में विचार करना होगा कि हम कैसे कृषि में गाय को प्राथमिकता दें। हमें इस दिशा में रूपरेखा निर्धारित करके उसे धरातल पर उतारना होगा। हमें गोमाता बचाना होगा। इसके लिए हर हिंदू एक गाय पाले। हमें अपने मठ मंदिरों से निकलकर पुरुषार्थ करना होगा, तभी हम गाय को बचा पाएंगे। भारत मजबूत होगा, तब पूरी दुनिया में हिंदुओं पर कोई अत्याचार करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। आज की तारीख में इजरायल पूरी दुनिया में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खुद स्थापित करने में सफल रहा है। यही वजह है कि दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी यहूदियों का अत्याचार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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