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आम महिलाओं को संसद में मौका मिलना चाहिए, फैमिली क्लब नहीं: तहसीन पूनावाला

पुणे, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की प्रशंसा की। उन्होंने ये भी कहा कि इस बिल से आम महिलाओं की संसद में भागीदारी बढ़नी चाहिए, फैमिली क्लब नहीं होना चाहिए।
आम महिलाओं को संसद में मौका मिलना चाहिए, फैमिली क्लब नहीं: तहसीन पूनावाला

पुणे, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की प्रशंसा की। उन्होंने ये भी कहा कि इस बिल से आम महिलाओं की संसद में भागीदारी बढ़नी चाहिए, फैमिली क्लब नहीं होना चाहिए।

पुणे में आईएएनएस से बातचीत में तहसीन पूनावाला ने कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। देश की जनता चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं संसद में आएं, लेकिन वे आम महिलाएं होनी चाहिए, जो वास्तव में योगदान दें, न कि सिर्फ अपने पति या पिता के पद की वजह से सदन में सदस्य बनें।

उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के लिए जिस आरक्षण बिल को सरकार लाना चाहती है, जिसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा, उसके पक्ष में भारत के ज्यादातर लोग नहीं हैं।

पूनावाला ने कहा कि सितंबर 2023 में सरकार ने संविधान में संशोधन किया था, लेकिन जनता को यह नहीं बताया कि आप क्या करने जा रहे हैं। फिर सरकार ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण प्रावधान लाना चाहते हैं। उस समय विपक्ष ने आपको चेतावनी दी थी कि आप सही दिशा में नहीं जा रहे हैं, लेकिन आपने विपक्ष की बात नहीं सुनी।

उन्होंने कहा कि अगर यह बिल सचमुच महिलाओं की भलाई के लिए है, तो आप इसकी ड्राफ्ट कॉपी देश की जनता के सामने क्यों नहीं रखते, ताकि इस पर खुली चर्चा हो सके, लोग इसे पढ़ सकें और अपनी राय दे सकें।

उन्होंने कहा कि हम भारत के लोग हैं, इसलिए जो भी आप हमारे लिए करना चाहते हैं, उसे पहले हमारे सामने रखिए। आप इसे एक राज बनाकर रखना चाहते हैं, क्योंकि यह आपका ‘मास्टरस्ट्रोक’ है।

तहसीन पूनावाला ने कहा कि हम भी महिलाओं के लिए आरक्षण चाहते हैं, लेकिन किस तरह का आरक्षण? क्या यह वही आरक्षण है जो पंचायतों और नगर निकायों में देखने को मिलता है। ज्यादातर महिलाएं जो पंचायतों में आती हैं वे किसी नेता की पत्नी या बेटी होती हैं।

उन्होंने कहा कि हमें ऐसे सांसद नहीं चाहिए कि अगर पति को टिकट न मिले तो पत्नी को दे दिया जाए या पिता को न मिले तो बेटी को दे दिया जाए। अगर पिता विधायक हैं तो बेटी भी विधायक बन जाए, अगर पत्नी सांसद हैं तो बेटी भी सांसद बन जाए। हमें यह ‘फैमिली क्लब’ नहीं चाहिए।

पूनावाला ने कहा कि हम आम महिलाओं को संसद में चाहते हैं, जो देश की आवाज उठाएं और कुछ योगदान दें, न कि केवल परिवार की वजह से टिकट मिलने वाली महिलाओं को।

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि सरकार लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने जा रही है तो यह गारंटी देनी होगी कि संसद ठीक से चलेगी। सांसदों को सवाल पूछने का अधिकार मिले। आजकल प्रश्नकाल लगभग होता ही नहीं है।

पूनावाला ने कहा कि संसद सदस्यों की उपस्थिति कम से कम 80 प्रतिशत अनिवार्य हो। हर सांसद को अपने क्षेत्र से जुड़े कम से कम 10 सवाल लिखित रूप में उठाने चाहिए और उन्हें जनता के सामने रखना चाहिए। अगर कोई सांसद दो सत्रों में 10 सवाल नहीं उठाता या उसकी उपस्थिति 80 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जाए।

तहसीन पूनावाला ने कहा कि हम करोड़ों रुपये संसद पर खर्च कर रहे हैं। हमें ‘फैमिली क्लब’ नहीं बनाना है, बल्कि संसद को प्रभावी ढंग से चलाना है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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