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मैच का रुख पलटने के लिए मशहूर थे सैयद अली, जिन्होंने ओलंपिक में भारत को दिलाया गोल्ड

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। सैयद अली... भारतीय हॉकी का एक ऐसा नाम, जिन्होंने देश को साल 1964 में खेले गए टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम किरदार निभाया था। सैयद अली की गिनती भारत के सबसे आक्रामक खिलाड़ियों में होती है। 1960-70 के दशक में सैयद अपने तेज-तर्रार खेल, बेहतरीन बॉल कंट्रोल, और फॉरवर्ड लाइन में अटैक करने के लिए जाने जाते थे।
मैच का रुख पलटने के लिए मशहूर थे सैयद अली, जिन्होंने ओलंपिक में भारत को दिलाया गोल्ड

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। सैयद अली... भारतीय हॉकी का एक ऐसा नाम, जिन्होंने देश को साल 1964 में खेले गए टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम किरदार निभाया था। सैयद अली की गिनती भारत के सबसे आक्रामक खिलाड़ियों में होती है। 1960-70 के दशक में सैयद अपने तेज-तर्रार खेल, बेहतरीन बॉल कंट्रोल, और फॉरवर्ड लाइन में अटैक करने के लिए जाने जाते थे।

सैयद अली का जन्म 17 जून 1949 को मध्यप्रदेश के भोपाल में हुआ था। भोपाल को भारतीय हॉकी की नर्सरी कहा जाता था और इसी समृद्ध खेल संस्कृति ने सैयद अली को शुरुआती दौर में ही हॉकी की ओर प्रेरित किया। अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय टीम में स्थान बनाया और जल्द ही फॉरवर्ड लाइन के भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए।

सैयद मुख्य रूप से फॉरवर्ड पोजीशन पर खेलते थे। वे अपनी तेज रफ्तार, सटीक पासिंग और गोल करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध थे। 1960–70 के दशक में जब भारतीय हॉकी विश्व स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही थी, उस समय उन्होंने टीम को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। सैयद अपने आक्रामक खेल के दम पर विपक्षी टीम पर दबाव बनाने के लिए मशहूर थे। सैयद अली की गिनती भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दौर के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में की जाती है।

सैयद अली ने 1968 और 1972 में खेले गए समर ओलंपिक में भारतीय टीम को कांस्य पदक दिलाने में भी अहम रोल अदा किया था। इसके साथ ही 1970 के एशियाई खेलों में भी सैयद अली ने अपने आक्रामक खेल के दम पर देश को रजत पदक दिलाया। साल 1972 में सैयद अली को भारतीय हॉकी के लिए दिए गए अहम योगदान के लिए 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था। सैयद अली उस दौर में टीम का हिस्सा थे जब भारतीय हॉकी विश्व स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही थी, फिर भी उन्होंने अपने खेल से टीम को मजबूती प्रदान की। आज भी उनका नाम भारतीय हॉकी के स्वर्णिम अध्यायों में सम्मान के साथ लिया जाता है।

--आईएएनएस

एसएम/आरएसजी

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