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'आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छुपाओगे...', राज्यसभा में पीएम मोदी का विपक्ष पर तंज

नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के माध्यम से हमारे देश के युवाओं को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। इन ऋणों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं द्वारा लिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार के अलावा हमने 10 करोड़ महिलाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की है। हमारे एमएसएमई क्षेत्र को भी ऋण सहायता प्रदान की गई है।
'आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छुपाओगे...', राज्यसभा में पीएम मोदी का विपक्ष पर तंज

नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के माध्यम से हमारे देश के युवाओं को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। इन ऋणों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं द्वारा लिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार के अलावा हमने 10 करोड़ महिलाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की है। हमारे एमएसएमई क्षेत्र को भी ऋण सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि मैं विश्वासपूर्वक कह ​​सकता हूं कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए), जो यूपीए शासनकाल में अपने उच्चतम स्तर पर थीं, अब अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। वर्तमान में एनपीए 1 प्रतिशत से कम हैं, जो हमारे बैंकों की अच्छी स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा, बैंक लाभ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।

उन्होंने कहा कि वही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, जिन्हें कभी कांग्रेस द्वारा बंद करने की कगार पर देखा गया था, अब रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रहे हैं। अपने प्रदर्शन से वे 'मेक इन इंडिया' पहल को गति प्रदान कर रहे हैं और अभूतपूर्व स्तर पर रोजगार सृजित कर रहे हैं।

उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छुपाओगे। कांग्रेस हो, टीएमसी हो, डीएमके हो, लेफ्ट हो... ये दशकों से केंद्र में सत्ता में रहे हैं, सत्ता के भागीदार रहे हैं। राज्यों में भी उन्हें सरकारें चलाने का अवसर मिला है, लेकिन उनकी पहचान क्या बनी? उन्होंने सिर्फ अपनी जेब भरने का काम किया, नागरिकों के जीवन में बदलाव लाना उनकी प्राथमिकता नहीं थी।

उन्होंने कहा कि आज डील की चर्चा होती है तो गर्व से कहते हैं, तब डील की चर्चा होती थी तो बोफोर्स डील आ जाता था, ये डील होते थे।

उन्होंने कहा कि हमने यह सुनिश्चित किया कि युवा और प्रतिभाशाली अधिकारियों को क्षेत्र के विकास में योगदान देने के लिए पूरे तीन साल दिए जाएं। छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला, जिसे कभी आकांक्षी जिला घोषित किया गया था, अब बस्तर ओलंपिक की मेजबानी के लिए सुर्खियों में है। कुछ गांवों में पहली बार बसें पहुंची हैं, जो कनेक्टिविटी और विकास में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है। वास्तविक कार्यान्वयन क्या कर सकता है, आकांक्षी जिले का यह उदाहरण इसे स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

--आईएएनएस

एमएस/डीकेपी

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