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आधी आबादी को 33 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए: शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

बरेली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बिल में संशोधन के जरिए महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव सही है, और उन्होंने पहले भी इसका स्वागत किया था।
आधी आबादी को 33 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए: शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

बरेली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बिल में संशोधन के जरिए महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव सही है, और उन्होंने पहले भी इसका स्वागत किया था।

संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर तीन दिवसीय स्पेशल सत्र की शुरुआत गुरुवार से हो गई है। हालांकि, सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी ने विरोध जताया।

बरेली में मौलाना रजवी ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि जहां तक समाजवादी पार्टी की बात है, अगर वह इस बिल का विरोध कर रही है तो यह उनका अपना नजरिया है। सपा विरोध की राजनीति पर ज्यादा ध्यान देती है और विकास के बुनियादी मुद्दों पर ध्यान नहीं देती।

मुस्लिम महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर मौलाना ने इस्लामी नजरिए से कहा कि राजनीतिक क्षेत्र को अक्सर मुश्किल जगह मानी जाती है। मुस्लिम महिलाओं को ऐसी स्थिति में लाना उचित नहीं है, क्योंकि इसमें अनजान लोगों के साथ उठना-बैठना पड़ता है, जो इस्लाम के नजरिए से गलत है। मुस्लिम महिलाओं को अपना मताधिकार है, लेकिन हम इस्लाम के जरिए बताते हैं कि उन्हें इस दलदल से दूर रहना चाहिए।

उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सपा को मुस्लिम महिलाओं से प्यार है तो हकीकत यह है कि वह मुस्लिम कद्दावर चेहरों को भी टिकट नहीं देती। सपा हिंदू कार्ड खेलना चाहती है, लेकिन सपा का कोर वोट मुस्लिम है। सपा को पहले भी हिंदू वोट नहीं मिले और 2027 के चुनाव में भी हिंदू वोट नहीं मिलेंगे।

मुसलमानों का वोट तो सपा को चाहिए लेकिन मुस्लिमों के मामलों पर सपा चुप्पी साध लेती है क्योंकि उसे डर है कि हिंदू वोट खिसक जाएगा। सच्चाई यह है कि उनके पास हिंदू वोट नहीं है और भविष्य में भी नहीं मिलेगा।

मौलाना ने आरक्षण की व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कमजोर वर्गों को आर्थिक या सामाजिक रूप से आरक्षण दिया है। भारत सरकार को महिलाओं को भी आरक्षण देना चाहिए, ताकि महिलाएं संसद पहुंच सकें और अपना प्रतिनिधित्व कर सकें।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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