उत्तर प्रदेश के मथुरा से होली और होलिका दहन के उत्सव को लेकर एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। वीडियो में एक शख्स को प्रहलाद बनकर होलिका दहन की आग में कूदते देखा जा सकता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि शख्स पूरी तरह सुरक्षित है और वह बिना किसी चोट के आग के बीच से गुजरता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कार्य किसी व्यक्ति की हिम्मत या साहस का मात्र प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह परंपरा और धार्मिक रिवाज का हिस्सा है। प्रहलाद बनकर होलिका दहन की आग में कूदने का यह उत्सव स्थानीय समुदाय में वर्षों से चलता आ रहा है। इसका उद्देश्य होलिका दहन के पर्व की कहानी—भाईचारे, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय—को जीवंत करना है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में इस पर उत्सुकता और चर्चा का माहौल बन गया है। कई लोग इस परंपरा की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परंपराओं में सावधानी और सुरक्षा उपायों का पालन बहुत जरूरी है, ताकि कोई हादसा न हो।
#WATCH | Mathura, UP: Following a very long tradition, a person portraying Prahlad walks through the Holika pyre at Phalen village.
— ANI (@ANI) March 3, 2026
Sanju Panda, who walked into the pyre, says, "...The preparation for this starts from Basant Panchami to Holika Dahan... At that time, attachment… pic.twitter.com/nzBKyciEG5
#WATCH | Mathura, UP: Following a very long tradition, a person portraying Prahlad walks through the Holika pyre at Phalen village.
— ANI (@ANI) March 3, 2026
Sanju Panda, who walked into the pyre, says, "...The preparation for this starts from Basant Panchami to Holika Dahan... At that time, attachment… pic.twitter.com/nzBKyciEG5
स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन में सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। आग के पास गार्ड तैनात किए गए हैं और शख्स ने विशेष प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के साथ इस परंपरा को निभाया। प्रशासन ने यह भी कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव को जीवंत बनाए रखना है, न कि किसी को जोखिम में डालना।
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रहलाद बनकर आग में कूदने का यह रिवाज बच्चों और युवाओं में उत्साह और धार्मिक भावना को जगाने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और इसका उद्देश्य होलिका दहन के धार्मिक महत्व को जीवित रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे परंपरागत उत्सवों में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों का आनंद तभी सुरक्षित रूप से लिया जा सकता है जब सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए। इस वीडियो ने यह साबित किया कि सावधानी और परंपरा का सही मेल होने पर धार्मिक उत्सव को सुरक्षित और रोमांचक तरीके से मनाया जा सकता है।
वीडियो में शख्स के सुरक्षित रूप से आग में कूदते हुए निकलने को देखकर दर्शक भी प्रभावित हुए हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर इसे उत्साहजनक और प्रेरक बता रहे हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि लोगों को होली और होलिका दहन के उत्सव की भावना से जोड़ती है।
इस प्रकार, मथुरा में प्रहलाद बनकर होलिका दहन में कूदने का यह वीडियो दर्शाता है कि धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक उत्सवों में साहस, भक्ति और सुरक्षा का संतुलन कितना महत्वपूर्ण है। यह घटना यह भी बताती है कि सही तैयारी और मार्गदर्शन के साथ इस प्रकार की परंपराओं को सुरक्षित रूप से निभाया जा सकता है।

