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18 से 25 साल के युवाओं की नई राह: रील के क्रेज और फर्जी टौ्र के चक्कर में कैसे 'अंडरवर्ल्ड' की गिरफ्त में आ रही नई पीढ़ी

18 से 25 साल के युवाओं की नई राह: रील के क्रेज और फर्जी टौ्र के चक्कर में कैसे 'अंडरवर्ल्ड' की गिरफ्त में आ रही नई पीढ़ी

मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना और राजस्थान के कोटा से 18 से 22 साल के तीन युवकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर देश में युवा अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बड़े अपराधियों के लिए बंदूक उठाने वाले ये युवा कौन हैं और कैसे अपराध की दुनिया तक पहुंचते हैं?एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली और हरियाणा में हत्या सहित गंभीर मामलों के कई युवा आरोपियों से बातचीत में गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ने के अलग-अलग रास्ते सामने आए। कहीं दोस्ती और भाईचारे के नाम पर युवाओं को जोड़ा गया, तो कहीं सोशल मीडिया पर गैंगस्टर जैसी छवि, पैसों का लालच और जेल में बने संपर्क इसकी वजह बने। कुछ युवाओं ने दावा किया कि शुरुआत में उन्हें 10 से 20 हजार रुपये तक देने का लालच दिया जाता है, लेकिन बाद में वही रास्ता उन्हें गंभीर अपराधों और लंबी कानूनी लड़ाई तक पहुंचा सकता है।

दोस्ती से शुरू हुआ सफर, फिर अपराध की दुनिया में फंसे युवा

19 वर्षीय एक युवक ने बताया कि उसके अपराध की दुनिया में जाने की शुरुआत स्कूल के दिनों में दोस्तों के साथ हुई थी। स्कूल से गायब रहना, सिगरेट पीना और गलत संगत में समय बिताना धीरे-धीरे उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।युवक के मुताबिक, जेल से बाहर आने पर उसके दोस्तों ने माला पहनाकर स्वागत किया और कहा, ‘भाई वापस आ गया।’ एक मामले में वह बरी हो चुका है, जबकि उसके खिलाफ दो अन्य मामले लंबित बताए गए हैं।

वहीं, 20 साल के एक दूसरे युवक पर हत्या का आरोप है और वह जमानत पर बाहर है। उसने बताया कि कभी उसका सपना MMA फाइटर बनने का था और वह पढ़ाई में भी अच्छा था। लेकिन अब वह खुद को ऐसे चक्र में फंसा हुआ महसूस करता है, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं है।

‘बाबू, तू ये काम कर दे, दो महीने में बाहर आ जाएगा’

युवाओं को अपराध के लिए तैयार करने में कथित तौर पर छोटे काम और जल्दी बाहर आने का लालच भी इस्तेमाल किया जाता है।रिपोर्ट में बातचीत के दौरान एक युवक ने बताया कि कुछ लोगों को इस तरह भरोसा दिलाया जाता है—‘बाबू, तू ये कर दे, दो महीने में बाहर आ जाएगा।’उसके दावे के मुताबिक, जेल में कुछ बड़े अपराधियों से संपर्क बनने के बाद युवाओं को आर्थिक मदद या संरक्षण का भरोसा दिया जा सकता है। बदले में उनसे बाहर निकलने पर कोई काम करने के लिए कहा जा सकता है।

, ऐसे दावों की पुष्टि हर मामले में अलग-अलग जांच और सबूतों के आधार पर ही की जा सकती है।

Instagram पर गैंगस्टर वाला स्वैग युवाओं को कर रहा प्रभावित?

सोशल मीडिया पर हथियारों, महंगी गाड़ियों, पैसों और दबदबे वाली जिंदगी का प्रदर्शन भी चर्चा में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की छवि कुछ किशोरों और युवाओं को अपराध की दुनिया की ओर आकर्षित कर सकती है।

दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) एचएस धालीवाल ने युवाओं की कम उम्र को एक ऐसा दौर बताया, जब वे बाहरी प्रभावों से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

एडवोकेट आशीष कुमार कंठ के मुताबिक, कुछ युवाओं के बीच ताकत को हथियारों और महंगी गाड़ियों से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति भी दिखाई देती है। Scorpio, Fortuner और Thar जैसी गाड़ियों के साथ गैंगस्टर वाली छवि सोशल मीडिया पर आकर्षण का हिस्सा बन सकती है।

लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली यह चमक अपराध के कानूनी परिणामों और उससे जुड़े खतरे को अक्सर पीछे छोड़ देती है।

₹10 से ₹20 हजार का लालच, फिर गंभीर अपराधों में फंसने का दावा

ट्रिपल मर्डर केस के 25 वर्षीय एक आरोपी ने दावा किया कि युवाओं को शुरुआत में 10 से 20 हजार रुपये देने का लालच दिया जाता है। उसके मुताबिक, अपराध होने के बाद कई बार उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है।

उसने फरार गैंगस्टर सनी सलेमपुर से संबंध होने की बात कही और दावा किया कि उसे कुछ लोगों के ठहरने का इंतजाम करने के लिए कहा गया था। बाद में उन्हीं लोगों पर हत्या करने का आरोप लगा।

एक अन्य 20 वर्षीय आरोपी ने बताया कि उससे केवल कुछ लोगों को एक जगह छोड़ने के लिए कहा गया था। बाद में वे लोग हत्या के मामले में आरोपी बने और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला विचाराधीन बताया गया है।

इन बयानों से यह सवाल उठता है कि क्या कुछ युवाओं को शुरुआत में काम की असली प्रकृति बताए बिना ऐसे नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाता है? हालांकि, किसी भी मामले में भूमिका और जिम्मेदारी का फैसला उपलब्ध सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।

‘फोटो दी जाती है और कहा जाता है—इसे मार दो’

रिपोर्ट में बातचीत के दौरान एक आरोपी ने दावा किया कि कुछ मामलों में कथित तौर पर किसी व्यक्ति की तस्वीर और समय जैसी जानकारी देकर हमला करने के लिए कहा जाता है। उसके अनुसार, नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं और जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति पूरी योजना या बाकी लोगों की पहचान जानता हो।

उसी आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ जेल में रहे दो लोगों को कथित तौर पर एक अपराध के लिए पांच लाख रुपये और Scorpio देने की पेशकश की गई थी।

उसका कहना था कि कुछ युवा पैसों के लालच में, जबकि कुछ भाईचारे या गैंग से जुड़े होने की भावना में अपराध करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

ये आरोप संबंधित व्यक्तियों के बयान हैं। इन्हें हर गैंग या हर आपराधिक मामले का प्रमाणित तरीका नहीं माना जा सकता।

क्या जेल में बनते हैं गैंग के नए संपर्क?

रिपोर्ट में शामिल कुछ युवाओं ने दावा किया कि जेल में रहने के दौरान भी गैंग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क और संबंध बन सकते हैं। उनके मुताबिक, किसी एक गिरोह से संरक्षण लेने के बाद प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के साथ दुश्मनी का खतरा भी बढ़ सकता है।

दिल्ली की तिहाड़ जेल में गैंग प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा चर्चित मामला टिल्लू ताजपुरिया की हत्या का है। रोहिणी कोर्ट शूटआउट मामले में आरोपी रहे ताजपुरिया की जेल के भीतर हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट में बातचीत करने वाले एक युवक ने जेल के अंदर मोबाइल फोन और नशीले पदार्थ पहुंचने के भी दावे किए। उसने देशी कट्टों की उपलब्धता और हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बारे में भी बातें कहीं। हालांकि, उसके इन व्यक्तिगत दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

कम उम्र के लड़कों का इस्तेमाल क्यों?

कम उम्र के युवाओं की कथित भूमिका कई गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आती रही है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में आरोपी रहे अंकित सिरसा की उम्र उस समय करीब 19 साल बताई गई थी। वहीं, गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के बारे में भी कम उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखने की खबरें सामने आती रही हैं।

इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि संगठित अपराध के मामलों में युवाओं की भूमिका जांच का विषय रही है। हालांकि, किसी आरोपी की कम उम्र अपने आप में अपराध में शामिल होने या दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

नाबालिगों के मामलों में किशोर न्याय व्यवस्था के तहत अलग कानूनी प्रक्रिया लागू होती है, जबकि वयस्क आरोपियों पर संबंधित कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

विदेशों तक पहुंचने के आरोप

रिपोर्ट में एक क्लासिफाइड कनाडाई इंटेलिजेंस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कनाडा में स्टूडेंट वीजा या वर्क परमिट पर मौजूद कुछ भारतीय युवाओं की आर्थिक परेशानियों का फायदा उठाकर उन्हें कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए भर्ती किया।

इस रिपोर्ट में अभिजीत किंगरा का उदाहरण दिए जाने और गोल्डी बराड़ के जरिए युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने के दावों का जिक्र किया गया। इन आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का आकलन आधिकारिक जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

बेरोजगारी, पढ़ाई छूटना और अवसरों की कमी भी चिंता का विषय

हरियाणा STF के IGP बी. सतीश बालन ने शिक्षा, रोजगार और अवसरों की कमी को भी इस समस्या से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं में गिनाया।

हालांकि, बेरोजगारी या पढ़ाई छूटने वाला हर युवा अपराध की राह नहीं चुनता। लेकिन जिन युवाओं को सही मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर नहीं मिलते, उन्हें गलत संगत और पैसों के लालच से बचाने के लिए समय रहते मदद देना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल छोड़ चुके युवाओं की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के प्रयास इस दिशा में मददगार हो सकते हैं।

अपराध के बाद परिवार भी झेलता है दर्द

गैंग से जुड़ने और गिरफ्तारी की कहानी का असर केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहता। परिवार को कानूनी खर्च, जेल में मुलाकात, सामाजिक दबाव और भविष्य की चिंता का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट में पंजाबी गायक गुरु रंधावा के जिम पर कथित फायरिंग के मामले में गिरफ्तार युवकों के परिवारों की परेशानी का भी जिक्र किया गया। जांचकर्ताओं ने इस घटना के तार कुछ संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप लगाया है।

एक आरोपी के पिता ने परिवार की बेबसी का जिक्र किया, जबकि दूसरे आरोपी की मां ने जेल में बेटे से मुलाकात और उसकी चोट को लेकर चिंता जताई।

ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और अदालत के फैसले से पहले आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी, इन घटनाओं का परिवारों पर पड़ने वाला असर गंभीर हो सकता है।

निष्कर्ष: शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन कीमत बहुत बड़ी

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले से लेकर दिल्ली और हरियाणा में सामने आई युवा आरोपियों की कहानियों तक, एक बड़ा सवाल बार-बार सामने आता है—आखिर युवाओं को अपराध की दुनिया से कैसे बचाया जाए?किसी के लिए शुरुआत दोस्ती से होती है, किसी के लिए सोशल मीडिया पर दिखने वाले गैंगस्टर स्वैग से, तो किसी के लिए पैसों और संरक्षण के लालच से। लेकिन कथित तौर पर छोटे काम से शुरू हुआ रास्ता गंभीर आरोपों, गिरफ्तारी, जेल और परिवार की परेशानियों तक पहुंच सकता है।इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ परिवार, स्कूल, समाज और रोजगार व्यवस्था की भी अहम भूमिका है। युवाओं को सही समय पर मार्गदर्शन, शिक्षा और अवसर मिलें, ताकि अपराध की दुनिया का आकर्षण उनके भविष्य पर भारी न पड़े।

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