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टीवी के रिमोट को लेकर बहस बनी मासूम की मौत का कारण: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 10 साल की बच्ची ने की आत्महत्या

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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां दो बहनों के बीच महज़ एक टीवी रिमोट को लेकर हुई बहस ने ऐसा भयानक रूप ले लिया कि छोटी बहन ने गुस्से में आकर अपनी जान दे दी। यह घटना समाज और परिवारों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि बच्चों की मानसिकता और भावनाओं को गंभीरता से समझना कितना जरूरी है।

रिमोट के लिए बहस बनी मौत की वजह

मामला गढ़चिरौली जिले के कोरची तालुका स्थित बोडेना गांव का है। 22 मई की सुबह सब कुछ सामान्य था। घर में बच्चे टीवी देख रहे थे और आपस में हंसी-मज़ाक कर रहे थे। 10 साल की सोनाली आनंद नरोटे, उसकी बड़ी बहन 12 वर्षीय संध्या, और छोटा भाई 8 साल का सौरभ अपने पसंदीदा टीवी प्रोग्राम देख रहे थे। इसी बीच सोनाली ने एक चैनल लगाया जो उसे पसंद था, लेकिन संध्या ने टीवी का रिमोट लेकर चैनल बदल दिया। इस पर दोनों बहनों के बीच बहस शुरू हो गई।

सोनाली ने बार-बार रिमोट वापस मांगा, लेकिन संध्या ने देने से इनकार कर दिया। इस छोटी सी बात ने सोनाली को गहरे तक आहत कर दिया। वह चुपचाप दूसरे कमरे में गई और कुछ देर बाद घर के पीछे खेत में चली गई। वहां एक पेड़ पर नायलॉन की रस्सी से फंदा बनाकर सोनाली ने आत्महत्या कर ली

परिवार को हुआ गहरा आघात

जब तक परिवार को इस बात का अंदेशा हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घर वालों ने सोनाली को खोजा और खेत में लटकता हुआ पाया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। यह दृश्य देखकर मां की हालत खराब हो गई, और पूरा गांव सदमे में डूब गया।

पिता की पहले ही हो चुकी थी मौत

जानकारी के अनुसार, सोनाली, संध्या और सौरभ तीनों गोंदिया जिले के एक प्राइवेट आश्रम स्कूल में पढ़ते हैं। गर्मियों की छुट्टियों में वे अपने गांव लौटे थे। उनके पिता की कुछ साल पहले मौत हो चुकी थी और मां ही अपने चारों बच्चों की देखभाल कर रही थीं। घटना के समय मां गांव में अपने छोटे बेटे शिवम के साथ थीं।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की जानकारी मिलते ही कोरची पुलिस स्टेशन से पुलिस निरीक्षक शैलेश ठाकरे, उप-निरीक्षक देशमुख और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पंचनामा कर शव को ग्रामीण अस्पताल भेजा गया और पोस्टमार्टम के लिए आगे की कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।

मानसिक स्वास्थ्य और संवाद की ज़रूरत

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों के मनोविज्ञान को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। बच्चों के छोटे-छोटे झगड़े कभी-कभी उनकी भावनाओं पर गहरा असर डालते हैं, जो tragically जानलेवा साबित हो सकता है। परिवारों और शिक्षकों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए और उन्हें यह सिखाना चाहिए कि जीवन की परेशानियों से कैसे निपटा जाए।

यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि मासूम दिलों की भी अपनी पीड़ा और भावनाएं होती हैं, जिन्हें हमें नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।

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