नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 955 मौतें, 3900 से ज्यादा लापता; वीडियो में चीन बोला- 12 दिन पहले ही भेज दी थी चेतावनी
नेपाल और तिब्बत में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 955 हो गई है। इनमें अकेले नेपाल में 939 लोगों की मौत हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 लोगों की जान गई है। वहीं, 3900 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है।
चीन पर जानकारी छिपाने के आरोप
बाढ़ के बाद नेपाल और चीन के बीच जरूरी मौसम और आपदा संबंधी जानकारी साझा करने को लेकर विवाद भी सामने आया है। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया कि चीन ने समय रहते उन खतरों से जुड़ी पर्याप्त जानकारी साझा नहीं की, जिनसे इस तरह की विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता था।नेपाल का कहना है कि चीन की ओर से भारी बारिश का पूर्वानुमान तो उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन हिमस्खलन, ग्लेशियरों की गतिविधि, पानी के स्तर, भूस्खलन और अन्य बड़े प्राकृतिक खतरों से जुड़ा जरूरी डेटा पर्याप्त रूप से साझा नहीं किया जाता। इस वजह से सीमावर्ती इलाकों में समय रहते तैयारी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मुश्किलें हो सकती हैं।
चीन ने आरोपों पर दी सफाई
नेपाल के आरोपों के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। चीन का कहना है कि उसके वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने बाढ़ आने से 12 दिन पहले नेपाल को ईमेल भेजकर भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ को लेकर चेतावनी दी थी। चीन के मुताबिक, उसने उपलब्ध मौसम संबंधी जानकारी समय पर साझा की थी।इस दावे के बाद अब दोनों देशों के बीच मौसम और आपदा संबंधी डेटा साझा करने की व्यवस्था को लेकर सवाल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। हालांकि, चेतावनी में किस तरह की जानकारी दी गई थी और वह जमीनी स्तर पर कितनी उपयोगी थी, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
27 मई को हुई थी अहम बैठक
दरअसल, बाढ़ की घटना से करीब तीन महीने पहले 27 मई को काठमांडू में नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों को लेकर बैठक हुई थी। इस दौरान नेपाल ने ग्लेशियरों में होने वाली शुरुआती हलचल और संभावित प्राकृतिक खतरों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने की मांग की थी।नेपाल के लिए हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे बेहद गंभीर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की अस्थिरता बढ़ रही है और इससे अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
हजारों लोगों की तलाश जारी
विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, जिनमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। कई लोग सुरंगों और मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और चीन के बीच सीमा पार आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी और मौसम संबंधी डेटा साझा करने की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहयोग और जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।

