अक्षय तृतीया विशेष: 9 दशक में तैयार देवी गंगा का यह भव्य मंदिर, दक्षिण भारतीय, राजपूत और मुगल शैलियों का दिखता है संगम
भरतपुर, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया का सनातन धर्म में बेहद महत्व है। नारद पुराण के अनुसार, इस दिन माता गंगा भी धरती पर अवतरित हुई थीं। ऐसे में भारत में माता गंगा के कई मंदिर हैं, जो दिव्य अनुभूति देते हैं। ऐसा ही राजस्थान के भरतपुर शहर में माता गंगा का भव्य मंदिर है, जो वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक अनुपम नमूना है।
यह मंदिर देवी गंगा को समर्पित है और अपनी भव्यता, जटिल नक्काशी के साथ तीन अलग-अलग शैलियों के अद्भुत मेल के लिए लोकप्रिय है। दक्षिण भारतीय, राजपूत और मुगल वास्तुकला का यह संगम इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देता है।
मंदिर का निर्माण वर्ष 1845 में महाराजा बलवंत सिंह ने शुरू कराया था। यह कोई साधारण निर्माण नहीं था। धन अपर्याप्त होने की वजह से महाराजा ने राज्य के सभी कर्मचारियों और समृद्ध नागरिकों को मंदिर बनाने में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया था। इस तरह यह एक सामुदायिक प्रयास बन गया। मंदिर का निर्माण लगभग 90 वर्ष (9 दशक) तक चला। जब निर्माण पूरा हुआ, तब बलवंत सिंह के पांचवें वंशज महाराजा बृजेंद्र सिंह ने देवी गंगा की संगमरमर की अद्भुत मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की। तभी से यह मंदिर गंगा मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
गंगा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता उसकी वास्तुकला है। इसमें दक्षिण भारतीय शैली के स्तंभ, राजपूताना की भव्यता और मुगल काल की नक्काशी का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। मंदिर की दीवारों और खंभों पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, फूलों, जानवरों और दैनिक जीवन के दृश्यों की बारीक नक्काशी की गई है। मंदिर के अंदर देवी गंगा की संगमरमर की मूर्ति है, जिसमें उन्हें विशाल मगरमच्छ पर विराजमान दिखाया गया है। यहां देवी गंगा के साथ ही भगवान शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण और राजा भागीरथ की चार फीट ऊंची मूर्ति भी मौजूद है। एक और आकर्षण भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का दृश्य है।
माता गंगा मंदिर के परिसर में एक बड़ी घंटी भी है, जिसकी गूंज पूरे परिसर में गूंजती है। मंदिर रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है। सुबह और शाम की आरती यहां खास आकर्षण होती है। आम दिनों के साथ ही गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी, अक्षय तृतीया के साथ ही अन्य अहम दिनों पर भी मंदिर में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं।
देवी गंगा का यह मंदिर भरतपुर शहर के बीचों-बीच स्थित है। दिल्ली, जयपुर, आगरा से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं, भरतपुर रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 5 किलोमीटर दूर है। यहां दिल्ली, मुंबई, जयपुर आदि शहरों से नियमित ट्रेनें आती हैं। निकटतम हवाई अड्डा आगरा (56 किमी) और जयपुर (175 किमी) है।
भरतपुर की यात्रा पर आए पर्यटक गंगा मंदिर को अवश्य शामिल करते हैं। यहां की शांति, भव्य वास्तुकला और आध्यात्मिक माहौल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। प्राचीन कला और आस्था का यह अनोखा संगम राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को और समृद्ध बनाता है।
मंदिर के आसपास घूमने लायक कई जगह है। गंगा मंदिर के पास ही केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जो यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों का घर है। इसके अलावा लोहागढ़ किला और डीग महल भी देखने लायक हैं।
--आईएएनएस
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