8th Pay Commission: नर्सों ने रखीं कई बड़ी मांगें, 3.25 फिटमेंट फैक्टर से लेकर 5% सालाना इंक्रीमेंट की मांग
आठवें वेतन आयोग की ओर से लगातार कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अलग-अलग संस्थानों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जा रही है। आयोग इन संगठनों से उनकी मांगों और सुझावों को समझने के लिए बैठकें कर रहा है। चंडीगढ़ में आयोग की दो दिवसीय बैठक 18 सितंबर को पूरी हो गई। अब अगली बैठक 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित की जाएगी, जहां संबंधित पक्षों से उनकी राय और मांगों पर चर्चा की जाएगी।
चंडीगढ़ में हुई बैठक के बाद नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन यानी NWA और PGIMER से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि बैठक में उनकी मांगों पर विस्तार से बातचीत हुई है। नर्सिंग संगठनों को उम्मीद है कि उनकी ओर से रखे गए प्रस्तावों पर आठवां वेतन आयोग सकारात्मक तरीके से विचार करेगा।
3 लाख से ज्यादा नर्सों को हो सकता है फायदा
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन यानी AINEF से जुड़े नर्सिंग संगठनों का कहना है कि अगर उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो इसका फायदा केंद्र सरकार के अस्पतालों, PGI, ESIC अस्पतालों, AIIMS और दूसरे हेल्थकेयर संस्थानों में काम करने वाले 3 लाख से ज्यादा नर्सों को मिल सकता है।
नर्सिंग संगठनों का कहना है कि आठवें वेतन आयोग के साथ हुई बातचीत उनके लिए काफी महत्वपूर्ण रही है और इसमें कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों को सामने रखा गया।
नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 पे की मांग
नर्सिंग संगठनों ने नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 का एंट्री लेवल पे निर्धारित करने की मांग रखी है। संगठन का तर्क है कि नर्सिंग की शैक्षणिक योग्यता और जिम्मेदारियों में बदलाव को देखते हुए वेतन संरचना में भी उचित बदलाव होना चाहिए।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि नर्सिंग अधिकारियों को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के बराबर रखने से जुड़ी पहले की सिफारिशों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
नाइट ड्यूटी और रिस्क अलाउंस की मांग
नर्सिंग संगठनों ने सभी नर्सिंग अधिकारियों के लिए अलग नाइट ड्यूटी अलाउंस देने की मांग भी की है। इसके साथ ही R1H1 मैट्रिक्स के तहत रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस देने का प्रस्ताव रखा गया है।
संगठन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ को लंबे समय तक ड्यूटी, रात की शिफ्ट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में उनकी ड्यूटी की प्रकृति को देखते हुए अतिरिक्त भत्तों पर विचार किया जाना चाहिए।
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस की भी मांग
नर्सिंग एसोसिएशन ने हेल्थकेयर कर्मचारियों के लिए कंप्रिहेंसिव टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा नर्सिंग अलाउंस, ड्रेस अलाउंस और स्पेशल अलाउंस में बदलाव की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती लागत के बीच बेहतर आर्थिक सहायता मिल सके।
चंडीगढ़ के लिए A1 सिटी कैटेगरी की मांग
एसोसिएशन ने HRA और TA की गणना के लिए चंडीगढ़ को A1 सिटी कैटेगरी में शामिल करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि इससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों को आवास और परिवहन से जुड़े भत्तों में बेहतर लाभ मिल सकता है।
इसके साथ ही नर्सिंग संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली की मांग भी दोहराई है।
3.25 फिटमेंट फैक्टर और 5% सालाना इंक्रीमेंट की मांग
PGIMER से जुड़े नर्सिंग कर्मचारियों ने आठवें वेतन आयोग में 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।
नर्सिंग संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में रहने, घर, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के दौरान फिटमेंट फैक्टर को भी इन बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।
इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की मांग भी की गई है। संगठन का तर्क है कि मौजूदा 3 प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी कर्मचारियों के बढ़ते खर्चों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।
अब इन मांगों पर आठवां वेतन आयोग क्या फैसला लेता है, यह उसकी आगे होने वाली बैठकों और अंतिम सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कर्मचारी संगठनों की ओर से अपनी मांगों और सुझावों को आयोग के सामने रखने का सिलसिला जारी है।

