Samachar Nama
×

ईरानी राष्ट्रपति ने देशवासियों से 84 नौसैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल होने का किया आग्रह

तेहरान, 17 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राजधानी तेहरान के लोगों से अपील की है कि वे उन 84 नौसैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हों, जिनकी मौत इस महीने ईरानी नौसेना के युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने से हुई थी।
ईरानी राष्ट्रपति ने देशवासियों से 84 नौसैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल होने का किया आग्रह

तेहरान, 17 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राजधानी तेहरान के लोगों से अपील की है कि वे उन 84 नौसैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हों, जिनकी मौत इस महीने ईरानी नौसेना के युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने से हुई थी।

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने संदेश में कहा कि ईरान के दुश्मनों को यह समझ लेना चाहिए कि "इन शहीदों के नाम की छाया तले हजारों नए बहादुर लोग खड़े होंगे।" यह बयान देश में राष्ट्रीय भावना और एकजुटता को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, मारे गए नौसैनिकों के ताबूत तेहरान के 34 अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों पर रखे जाएंगे, जहां आम लोग पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। यह आयोजन बड़े पैमाने पर जनभागीदारी के साथ किया जा रहा है, जिससे शोक के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी दिया जा सके।

इससे पहले देश के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी के आधिकारिक एक्स पोस्ट से एक पोस्ट शेयर किया गया। इसमें उन्होंने मारे गए नाविकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

हालांकि ये नोट ऐसे समय में सामने आया जब इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया कि वो मिसाइल हमलों में मारे गए हैं।

28 फरवरी को इजरायल-यूएस की ईरान पर संयुक्त एयर स्ट्राइक से मध्य पूर्व में काफी तनाव का माहौल है। इन हमलों में सर्वोच्च लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद से ही ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई शुरू हो गई। निशाने पर पड़ोसी और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य बेस रहे।

इस सैन्य संघर्ष ने पश्चिम एशिया को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की दिक्कतों में इजाफा कर दिया है। अगर ये हमले यूं ही जारी रहे तो दुनिया में फ्यूल, क्रूड ऑयल की भारी दिक्कत हो सकती है।

वैसे, ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जो 2018 यूएस-ईरान परमाणु समझौते (जेसीपीओए) के टूटने से और बढ़ गया। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य घटनाएं हुईं, जिनमें जहाजों पर हमले और सैन्य टकराव शामिल हैं।

--आईएएनएस

केआर/

Share this story

Tags