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8 नवंबर का पंचांग: दीपावली की पूजा का शुभ मुहूर्त कब, रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक रहेगा अमृत काल

8 नवंबर का पंचांग: दीपावली की पूजा का शुभ मुहूर्त कब, रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक रहेगा अमृत काल
8 नवंबर का पंचांग: दीपावली की पूजा का शुभ मुहूर्त कब, रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक रहेगा अमृत काल

नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शनिवार को सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर अगले दिन रविवार को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। रविवार को सुबह 6:40 बजे सूर्योदय और शाम 5:41 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 5:34 बजे चंद्रोदय और शाम 4:54 बजे चंद्रास्त होगा।

रविवार को दीपावली का पावन पर्व मनाया जाएगा। मां लक्ष्मी की पूजा की शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक रहेगा। निशिता काल (रात्रि पूजा) रात 11:44 बजे से मध्य रात्रि 12:36 बजे तक रहेगा। ऑफिस में पूजा के मुहूर्त की बात करें तो दोपहर 1:26 बजे से 2:54 बजे तक ऑफिस में पूजा करना शुभ रहेगा।

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य देव के विशाखा नक्षत्र में रहने से व्यक्ति के स्वभाव, कार्यक्षेत्र और जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं, जिसके कारण व्यक्ति के अंदर उच्च पद प्राप्त करने, अधिकार जमाने और जीत हासिल करने की तीव्र लालसा होती है। राजनीति, प्रशासन, कानून, प्रबंधन या किसी भी प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में यह स्थिति व्यक्ति को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।

रविवार तड़के 3:27 बजे आयुष्मान योग रहेगा, जो सोमवार सुबह 3:02 बजे तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग आरंभ होगा। ज्योतिष के अनुसार, आयुष्मान योग 27 नित्य योगों में से तीसरा नित्य योग माना जाता है। इसके स्वामी चंद्रमा (या कुछ मान्यताओं में देवगुरु बृहस्पति/शिव) माने गए हैं। इस योग में जन्मे जातक ऊर्जावान, सकारात्मक, शारीरिक रूप से बलवान और अच्छे स्वास्थ्य वाले होते हैं।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभावों या दोषों का स्वतः नाश हो जाता है। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।

रविवार को रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन राहुकाल शाम 4:18 बजे से 5:41 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। इसकी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है और यह हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।

रविवार को यमगंड काल दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए।

इस दिन गुलिक काल दोपहर 2:55 बजे से 4:18 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।

रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ होना कहा जाता है। सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है। सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है। इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

इस दिन चंद्र देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा के तुला राशि में रहने या गोचर करने से व्यक्ति के स्वभाव, रिश्तों और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विशेष प्रभाव पड़ता है। तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो सुंदरता, प्रेम, कला और सुख-सुविधाओं के कारक हैं। तुला राशि का चंद्रमा जातक को सुंदर, आकर्षक, मिलनसार और कलाप्रेमी बनाता है। इन्हें सुंदर वातावरण, साफ-सफाई और सजने-संवरने का शौक होता है।

रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

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