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15 दिन की छुट्टियों से पहले स्कूल में सो गया 7वीं का छात्र, ताला लगाकर चले गए शिक्षक; पूरी रात बंद रहा, पूरा स्टाफ सस्पेंड

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श्रीनगर/रामबन: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले से सरकारी स्कूल की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां सातवीं कक्षा का एक छात्र स्कूल में ही सो गया, लेकिन छुट्टी के बाद किसी शिक्षक या कर्मचारी ने यह जांचने की जरूरत नहीं समझी कि परिसर में कोई बच्चा तो नहीं रह गया। नतीजा यह हुआ कि छात्र पूरी रात स्कूल की बंद कक्षा में कैद रहा। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्कूल के पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना रामबन जिले के बनिहाल क्षेत्र स्थित एक सरकारी मिडिल स्कूल की है। बताया जा रहा है कि सातवीं कक्षा का छात्र दोपहर में कक्षा के भीतर सो गया था। स्कूल की छुट्टी होने के बाद शिक्षक और अन्य कर्मचारी बिना यह सुनिश्चित किए कि सभी छात्र परिसर से बाहर निकल चुके हैं, स्कूल में ताला लगाकर चले गए। कुछ देर बाद जब छात्र की नींद खुली तो उसने खुद को बंद कमरे में पाया।

बताया जाता है कि छात्र ने बाहर निकलने की काफी कोशिश की। उसने दरवाजा खटखटाया और मदद के लिए आवाज भी लगाई, लेकिन स्कूल बंद होने के कारण उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी। देर शाम स्थानीय लोगों को स्कूल के भीतर से आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद उन्होंने प्रशासन और परिजनों को सूचना दी। मौके पर पहुंचे लोगों ने स्कूल का ताला खोलकर छात्र को सुरक्षित बाहर निकाला।

घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक जांच में स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आने पर पूरे स्टाफ को निलंबित कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि किसी भी छात्र की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्कूल प्रशासन की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। उनका कहना है कि यदि छात्र की समय पर आवाज नहीं सुनी जाती तो उसके साथ कोई गंभीर अनहोनी हो सकती थी। अभिभावकों ने भी स्कूलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्कूल में छुट्टी के बाद प्रत्येक कक्षा, शौचालय, प्रयोगशाला और परिसर की पूरी तरह जांच करना अनिवार्य प्रक्रिया होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की जिम्मेदारी होती है कि कोई भी बच्चा स्कूल परिसर में न रह जाए। ऐसी लापरवाही न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी है।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने भी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही, स्कूल बंद करने से पहले प्रत्येक कमरे और परिसर का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य किया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में सुरक्षा मानकों और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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