Samachar Nama
×

50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों में नींद की समस्या आम, काम का तनाव बना बड़ी वजह

50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों में नींद की समस्या आम, काम का तनाव बना बड़ी वजह
50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों में नींद की समस्या आम, काम का तनाव बना बड़ी वजह

नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। 50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों में नींद से जुड़ी परेशानियां उम्मीद से कहीं ज्यादा आम हैं। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि काम से जुड़ा तनाव, असंतुलित जीवनशैली और नौकरी से जुड़ी परेशानियां न सिर्फ नींद को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी असर डाल रही हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि करीब 70 प्रतिशत प्रतिभागियों को लगातार ऐसी नींद की समस्या थी, जो चिकित्सकीय रूप से गंभीर मानी जा सकती है। खास बात यह है कि इनमें से किसी भी व्यक्ति का पहले से कोई ज्ञात स्लीप डिसऑर्डर का इतिहास नहीं था। वहीं, करीब 92 प्रतिशत लोगों में अध्ययन के दौरान कम से कम एक बार नींद संबंधी समस्या के मानक पूरे पाए गए।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन समस्याओं का संबंध केवल उम्र बढ़ने से नहीं है, बल्कि काम के दबाव और तनाव का भी इसमें बड़ा योगदान है। जिन लोगों ने बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और नौकरी से संतुष्टि की बात कही, उनमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर पाया गया। वहीं, जो लोग काम के दौरान तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस करते थे, उनमें स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां ज्यादा देखने को मिलीं।

इस अध्ययन में 50 से 66 वर्ष की उम्र के 45 कर्मचारियों को शामिल किया गया। ये लोग अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे थे। शोधकर्ताओं ने करीब एक साल तक इन लोगों की निगरानी की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों से स्वास्थ्य, काम और जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे। इसके अलावा स्मार्टवॉच और अन्य पहनने वाले सेंसर के जरिए उनकी नींद का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया।

अध्ययन में सामने आया कि ज्यादातर लोग रात में 6.5 से 8 घंटे तक सो रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुबह उठने के बाद पूरी तरह आराम महसूस नहीं होता था। इसकी वजह कम सोना नहीं, बल्कि रात में बार-बार नींद टूटना और नींद की गुणवत्ता खराब होना थी।

शोधकर्ताओं ने बताया कि कई लोग अपनी खराब नींद का कारण पर्याप्त समय न मिलना मानते हैं, लेकिन स्मार्टवॉच से मिले आंकड़ों ने दिखाया कि असली समस्या बार-बार नींद में खलल पड़ना थी। करीब 90 प्रतिशत प्रतिभागियों में अध्ययन के दौरान नींद में रुकावट देखी गई।

शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन से कारण नींद और स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इसमें काम से जुड़े अनुभव सबसे महत्वपूर्ण कारणों में सामने आए। इससे संकेत मिलता है कि नौकरी का तनाव नींद और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक हो सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग बिजनेस स्कूल की डॉ. बेलिंडा स्टेफन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलावों के अलावा आर्थिक चिंता, परिवार की जिम्मेदारियां और काम का तनाव भी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नींद को अब कार्यस्थल की सेहत और कर्मचारियों के कल्याण से जोड़कर देखने की जरूरत है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

Share this story

Tags