5 मई को एकदंत संकष्टी, अभिजित के साथ विजय मुहूर्त का शुभ संयोग, नोट कर लें राहुकाल का समय
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। विघ्न विनाशन भगवान श्री गणेश को समर्पित एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पर्व 5 मई (मंगलवार) को पड़ रहा है। बैशाख मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को एकदंत संकष्टी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश के एकदंत रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
एकदंत गणेश को गणेश जी के अष्टविनायक रूपों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव से मिलने जा रहे गणेश जी को भगवान परशुराम ने रोका। विवाद के बाद परशुराम ने अपना परशु चलाया, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट गया। तभी से वे एकदंत नाम से प्रसिद्ध हुए। मान्यता है कि इस दिन भक्त एकदंत गणेश की पूजा करने से बाधाओं का निवारण और सिद्धि की प्राप्ति होती है। एकदंत गणेश की आराधना से बुद्धि, विद्या और सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है। इस पावन अवसर पर भक्त गणपति को मोदक, लड्डू और दुर्वा चढ़ाना श्रेयस्कर होता है।
एकदंत संकष्टी को सूर्योदय 5 बजकर 37 मिनट मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 35 मिनट पर होगा। तिथि चतुर्थी पूर्ण रात्रि तक रहेगी, नक्षत्र ज्येष्ठा दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक, योग शिव देर रात 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
इस दिन अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक है। अभिजित मुहूर्त को किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है, जबकि विजय मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य सफलता दिलाता है। गणेश पूजा, नए काम या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह संयोग बहुत ही शुभ है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल का समय दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शाम 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य शुरू न करें। यमगंड सुबह 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक
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