चुनाव आयोग को 48 घंटे का अल्टीमेटम, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; फुटेज में जाने SIR और वोटर लिस्ट को लेकर प्रदर्शन की चेतावनी
चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को विपक्षी दल की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिए जाने की बात सामने आई। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं, तो जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक आंकड़ों की जांच आवश्यक है।
13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का असर लोगों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में जनता को सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में यह तय किया जा रहा है कि कौन वोट डाल सकता है और कौन नहीं।दीपके ने कहा कि वोट चोरी लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता लाने की मांग की।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट का जिक्र
सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम के संबंध में आपत्तियां उठाए जाने की बात कही गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने चुनाव आयोग से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जांच की मांग की।चुनाव आयोग की ओर से रिपोर्ट से जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इसलिए आयोग के भीतर मतभेद और SIR प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को समझने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाबों को ध्यान में रखना जरूरी है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने 48 घंटे की समयसीमा के बाद देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। पार्टी ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान की घोषणा भी की। इसके अलावा, दिल्ली में जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरने की बात कही गई। इस पूरे मामले में मुख्य विवाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा है। पार्टी के आरोपों और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संबंध में अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक आंकड़ों, आयोग के जवाब और स्वतंत्र जांच की जानकारी जरूरी होगी।

