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466 करोड़ रुपए से होगा झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स का कायाकल्प

466 करोड़ रुपए से होगा झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स का कायाकल्प
466 करोड़ रुपए से होगा झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रिम्स का कायाकल्प

रांची, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 466 करोड़ रुपए की पुनर्विकास योजना को मंजूरी दी गई है। संस्थान की गुरुवार को आयोजित गवर्निंग बॉडी की 66वीं बैठक में कुल 16 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इनमें फैकल्टी के पदों का पुनर्गठन, एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ाना, सुपर स्पेशियलिटी के 10 नए विभाग खोलना, मरीजों के इलाज की सुविधाओं का विस्तार और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव जैसे फैसले शामिल हैं।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लिए गए फैसलों को अगली बैठक तक लागू करने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों को इनका लाभ मिल सके। उन्होंने कैंसर की महंगी दवाओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव के अनुसार, रिम्स में वर्ष 2002 के बाद पहली बार फैकल्टी और विभागों की संरचना का व्यापक पुनर्गठन किया जा रहा है। फैकल्टी के मौजूदा 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन के साथ 16 नए पद सृजित किए जाएंगे। इससे पदों की कुल संख्या 335 हो जाएगी। योजना के तहत एमबीबीएस की सीटें बढ़ाकर 250 और पीजी की सीटों में 100 की वृद्धि करने का प्रस्ताव है। सुपर स्पेशियलिटी की सीटें मौजूदा 11 से बढ़ाकर 150 करने और इसके लिए 10 नए विभाग खोलने की योजना है।

रिम्स परिसर के पुनर्विकास के लिए 466 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली योजना में अस्पताल, शैक्षणिक भवनों और आवासीय परिसरों का नवीनीकरण तथा नए शैक्षणिक भवन का निर्माण शामिल है। परियोजना को केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए हॉस्टल बनाने और इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अपनाने पर भी विचार किया गया। पुराने डीआईजी ग्राउंड में स्टेडियम के साथ हॉस्टल बनाने की योजना है।

अस्पताल की सुविधाओं के विस्तार के तहत वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाकर 25 करने, अल्ट्रासाउंड मशीनें बढ़ाने और बर्न वार्ड को बेहतर बनाने की योजना है। नर्सों और हॉस्पिटल मैनेजरों की बहाली के साथ आयुष्मान भारत योजना के मरीजों की सहायता के लिए 100 आयुष्मान मित्र नियुक्त करने का प्रस्ताव है। प्रशासनिक सुधारों के तहत पुराने रेगुलेशन-2014 की जगह रेगुलेशन-2026 तैयार किया जा रहा है। स्थायी समितियों की संख्या पांच से बढ़ाकर 10 की जाएगी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट के अधीन डिप्टी सुपरिटेंडेंट के पदों की व्यवस्था होगी। डॉक्टरों के प्रमोशन में शोध के साथ मरीजों के इलाज, क्लिनिकल सेवाओं और मेडिकल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में योगदान को भी महत्व देने का प्रस्ताव है।

स्वास्थ्य मंत्री ने रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी एसएएफ को सौंपने और होमगार्ड जवानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही। स्थायी निदेशक की नियुक्ति होने तक डीके सिंह जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा। बैठक में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के करीब 240 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो सके हैं। ऐसे में प्रस्तावित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना और उपलब्ध राशि का प्रभावी उपयोग संस्थान के सामने अहम चुनौती होगी।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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