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43 देशों के 50 से अधिक प्रतिनिधि पेरिस में बीएपीएस हिंदू मंदिर में

43 देशों के 50 से अधिक प्रतिनिधि पेरिस में बीएपीएस हिंदू मंदिर में
43 देशों के 50 से अधिक प्रतिनिधि पेरिस में बीएपीएस हिंदू मंदिर में

पेरिस/बुसी-सेंट-जॉर्जेस, 12 सितंबर (आईएएनएस)। यूनेस्को के 43 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 50 से अधिक राजदूत और प्रतिनिधि गुरुवार को बुसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित नवनिर्मित बीएपीएस स्वामिनारायण हिंदू मंदिर में विशेष ‘इंडो-फ्रेंच कल्चरल ओपन डे’ के लिए एकत्रित हुए।

यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल द्वारा आयोजित इस समारोह में यूरोप, अफ्रीका, एशिया, अरब देशों, अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के राजदूत, स्थायी प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि तथा यूनेस्को के अधिकारी उपस्थित रहे। मंदिर के निर्माण के आधारभूत मूल्यों – सेवा, सांस्कृतिक समझ और संवाद – का परिचय कराने वाले कार्यक्रम से पहले अतिथियों को पारंपरिक भारतीय भोजन के लिए आमंत्रित किया गया।

यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए मंदिर को 'भारत की सभ्यता, विरासत और भारत-फ्रांस के सहयोग से साकार हुई शिल्पकला का अद्भुत संगम' बताया। यूनेस्को के संदर्भ में मंदिर के महत्व पर उन्होंने कहा, “यूनेस्को से जुड़े हम सभी के लिए इस मंदिर का विशेष महत्व है, क्योंकि संस्कृति और विरासत यूनेस्को के हृदय में हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यहां भारतीय सांस्कृतिक विरासत भारत से बाहर एक जीवंत परंपरा के रूप में साकार हो रही है।” उन्होंने कहा, “‘भारत में निर्मित, फ्रांस में असेंबल्ड’ यह मंदिर विश्व द्वारा स्वागत प्राप्त कर रहा है।”

एक विशेष फिल्म के माध्यम से मंदिर और उसके निर्माण के पीछे के असाधारण सहयोग की गाथा प्रस्तुत की गई, जिसमें मंदिर निर्माण में सदियों पुरानी भारतीय शिल्पकला और स्थापत्य परंपराओं का फ्रांस की इंजीनियरिंग कुशलता के साथ हुआ अनूठा संगम दर्शाया गया।

यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की डिप्टी डायरेक्टर ज्योति होसाग्रहर ने कहा कि मंदिर उस जीवंत विरासत और सांस्कृतिक संवाद को मूर्त रूप देता है, जिसे यूनेस्को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा, “यूनेस्को ऐसी पहलों को विशेष महत्व देता है, जो सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाती हैं, समुदायों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करती हैं तथा अंतर-सांस्कृतिक संवाद और परस्पर समझ को प्रोत्साहित करती हैं।”

--आईएएनएस

डीकेपी/

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