4-लेन या 6-लेन? जानिए ट्रैफिक के आधार पर कैसे बदलेगा दिल्ली, कानपुर, पटना और जयपुर हाईवे का डिजाइन
देश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ सड़कों पर वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य के ट्रैफिक दबाव को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के डिजाइन और निर्माण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
नई व्यवस्था के तहत अब हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे की लेन और स्ट्रक्चर की क्षमता वहां के मौजूदा और अनुमानित ट्रैफिक लोड को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। यह व्यवस्था एक्सप्रेसवे को छोड़कर नए हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे पर लागू होगी।
नई गाइडलाइन का उद्देश्य पूरे देश में हाईवे के डिजाइन और निर्माण के लिए एक समान तकनीकी और सुरक्षा मानक तैयार करना है। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा बढ़ाने और वाहनों की आवाजाही को ज्यादा सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया है।
कितने ट्रैफिक पर 4 लेन और कब 6 लेन?
NHAI की नई व्यवस्था के मुताबिक हाईवे की लेन की संख्या केवल मौजूदा वाहनों की संख्या देखकर तय नहीं होगी। विस्तृत ट्रैफिक आकलन के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसी कॉरिडोर पर कितनी लेन और किस क्षमता के स्ट्रक्चर की जरूरत है।
नई गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्था इस तरह होगी:
- 15 हजार वाहन तक: 4 लेन हाईवे, 4 लेन स्ट्रक्चर और 60 मीटर चौड़ाई
- 15 से 25 हजार वाहन: 4 लेन हाईवे, लेकिन 6 लेन स्ट्रक्चर और 70 मीटर चौड़ाई
- 25 से 40 हजार वाहन: 6 लेन हाईवे, 6 लेन स्ट्रक्चर और 70 मीटर चौड़ाई
इसका मतलब साफ है कि भविष्य में किसी सड़क की चौड़ाई केवल यह देखकर तय नहीं की जाएगी कि वह 4 लेन है या 6 लेन। सड़क की डिजाइन में वर्तमान ट्रैफिक के साथ-साथ आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात को भी ध्यान में रखा जाएगा।
नए 4 और 6 लेन हाईवे पर लागू होंगे नियम
NHAI के मुताबिक नई गाइडलाइन सभी नए 4 और 6 लेन ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे पर लागू होगी।
अब तक एक्सप्रेसवे को छोड़कर इस तरह के हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के डिजाइन और निर्माण के लिए एक समान मानक नहीं थे। इसके कारण अलग-अलग परियोजनाओं की DPR यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करते समय अलग-अलग मानकों का इस्तेमाल किया जा सकता था।
नई गाइडलाइन के जरिए इस अंतर को कम करने और हाईवे निर्माण में एकरूपता लाने की कोशिश की गई है।
किन जगहों पर बनेंगे इंटरचेंज और रैंप?
हाईवे पर ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए महत्वपूर्ण सड़कों के जंक्शन पर इंटरचेंज और रैंप की व्यवस्था की जाएगी।
इसके तहत एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के अलावा ज्यादा ट्रैफिक वाली प्रमुख सड़कों के कनेक्शन को भी ध्यान में रखा जाएगा।
इसके अलावा पोर्ट, एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कों पर भी जरूरत के मुताबिक इंटरचेंज बनाए जाएंगे।
आवारा पशुओं और अनधिकृत एंट्री पर भी फोकस
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अनधिकृत प्रवेश और अतिक्रमण को रोकने के लिए भी नई गाइडलाइन में प्रावधान किए गए हैं।
हाईवे के बाहरी किनारे पर करीब 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाने का प्रावधान है। इसका एक उद्देश्य आवारा पशुओं को हाईवे पर आने से रोकना भी है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहनों वाले कॉरिडोर पर ऐसे हादसे गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा वाहन चालकों को हाईवे के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट की जानकारी पहले से मिल सके, इसके लिए अतिरिक्त साइन बोर्ड और जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
भविष्य के ट्रैफिक को देखते हुए तैयार होंगे हाईवे
NHAI की नई गाइडलाइन का फोकस सिर्फ सड़क बनाने पर नहीं, बल्कि भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों के हिसाब से हाईवे को तैयार करने पर है।
ट्रैफिक लोड के आधार पर लेन, स्ट्रक्चर, इंटरचेंज और सुरक्षा व्यवस्था तय होने से अलग-अलग हाईवे परियोजनाओं में डिजाइन को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
यानी आने वाले समय में देश में बनने वाले हाई-स्पीड नेशनल हाईवे आज के ट्रैफिक के साथ कल की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाएंगे।

