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2029 तक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा होगी मजबूत, वीडियो में जाने 36 किमी लंबी अंडरग्राउंड रेल टनल बनाने की तैयारी

2029 तक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा होगी मजबूत, वीडियो में जाने 36 किमी लंबी अंडरग्राउंड रेल टनल बनाने की तैयारी

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। चिकन नेक के नाम से पहचाने जाने वाला यह संकरा गलियारा भारत की सामरिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्देश्य सेना की आवाजाही बेहतर बनाना, सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति तेज करना और आपात स्थिति में संपर्क व्यवस्था को मजबूत रखना है।

जून 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम क्षेत्र में हुए सैन्य गतिरोध के बाद इस इलाके में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित है और इसके जरिए पूर्वोत्तर के राज्य देश के अन्य हिस्सों से जुड़े रहते हैं। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यहां परिवहन और सैन्य आवाजाही को मजबूत करना रणनीतिक प्राथमिकता माना जाता है।

सैन्य आवाजाही तेज करने पर जोर

सिलीगुड़ी कॉरिडोर और सिक्किम क्षेत्र में सड़क, रेल और अन्य सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में संकरे रास्ते और सीमित परिवहन नेटवर्क होने से भारी सैन्य वाहनों, तोपों और सैनिकों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है।प्रस्तावित परियोजनाओं से सेना को सीमा के नजदीक स्थित क्षेत्रों तक पहुंचने में लगने वा समय कम करने में मदद मिल सकती है। उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में कुछ सैन्य आवाजाही में 12 से 18 घंटे लग सकते हैं, जबकि परियोजनाएं पूरी होने के बाद यह समय घटकर करीब तीन घंटे रह सकता है। हालांकि, इस समय-सीमा और 2029 तक सभी परियोजनाएं पूरी होने के लक्ष्य की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

जमीन के नीचे 36 किलोमीटर लंबी रेल टनल की योजना

इस योजना का एक अहम हिस्सा करीब 36 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेल टनल बताई जा रही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के एक ड्राफ्ट में पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के तीन माइल हाट से सिलीगुड़ी के पास रांगापानी तक रेल टनल का प्रस्ताव शामिल है।बताया जा रहा है कि टनल जमीन से लगभग 20 मीटर नीचे बनाई जा सकती है। भूमिगत रेल मार्ग विकसित होने से रेल यातायात के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध हो सकता है। इससे सामान्य परिस्थितियों में परिवहन व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने और आपात स्थिति में सैन्य रसद की आवाजाही बनाए रखने में मदद मिल सकती है।हालांकि, टनल की अंतिम लंबाई, निर्माण की गहराई, मार्ग और पूरा होने की समय-सीमा को लेकर आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों से पुष्टि आवश्यक है। इसे पूरी तरह स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजना मानने से पहले संबंधित रेलवे या सरकारी एजेंसी की जानकारी देखना जरूरी होगा।

पूर्वोत्तर से संपर्क बनाए रखना अहम

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख भू-मार्ग है। किसी प्राकृतिक आपदा, सैन्य तनाव या परिवहन बाधा की स्थिति में इस गलियारे की कनेक्टिविटी प्रभावित होने से आपूर्ति और आवाजाही पर असर पड़ सकता है।

बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से सेना के साथ-साथ आम नागरिकों, व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भी लाभ मिल सकता है। भूमिगत रेल मार्ग जैसी परियोजनाएं परिवहन के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।कुल मिलाकर, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लागत, समय-सीमा और सैन्य आवाजाही में होने वाली संभावित बचत के बारे में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

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