स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एएमसीए के लिए आरएफपी जारी, कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के 30 महीने में देना होगा पहला प्रोटोटाइप
नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। भारत ने अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम एएमसीए की रफ्तार तेज कर दी है। इसी कड़ी में रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एएमसीए के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया। आरएफपी के मुताबिक, 11 जून से बिडिंग प्रक्रिया शुरू होगी और 27 जुलाई इसकी अंतिम तारीख होगी। 28 जुलाई को बिड खोली जाएगी। आरएफपी के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने के 30 महीने के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान की समय-सीमा तय की गई है। कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल फाइटर जेट प्रोटोटाइप तैयार किए जाने हैं।
भारत सरकार की एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) एएमसीए के विकास के लिए संभावित बोलीदाताओं से खरीद प्रक्रिया में भागीदारी मांगी है। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) एक पांचवीं पीढ़ी का, मध्यम भार वर्ग का, बहुउद्देश्यीय, दो इंजन वाला और कम दृश्यता क्षमता से लैस लड़ाकू विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की आवश्यकताओं के आधार पर डिजाइन और विकसित किया जा रहा है।
एडीए द्वारा उपलब्ध कराए गए डिजाइन डेटा और ड्रॉइंग्स के आधार पर एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप तथा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा विभिन्न परीक्षण सुविधाओं की स्थापना भी की जाएगी। बिडर को इस आरएफपी के तहत एएमसीए की फ्लाइट टेस्टिंग और टाइप सर्टिफिकेशन गतिविधियों में सहयोग देना होगा। विमान को इक्विपमेंट स्टैंडर्ड ऑफ प्रिपरेशन (ईएसओपी) के अनुरूप कॉन्फिगर किया जाएगा तथा इसमें संचालन, परीक्षण और मूल्यांकन के लिए आवश्यक लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs) और ऑनबोर्ड सिस्टम शामिल किए जाएंगे।
एएमसीए की शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया में तीन निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाले कंसोर्टियम सामने आए हैं, जिनमें टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत फोर्ज-बीईएमएल शामिल हैं।
पिछले साल 27 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोग्राम के लिए निजी कंपनियों के साथ इसके एग्जिक्यूशन मॉडल के विकास को मंजूरी दी थी। इसके महज 20 दिन बाद ही एएमसीए के विकास के लिए निजी कंपनियों से ईओआई यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगे गए थे।
एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की ओर से कहा गया था कि ईओआई का उद्देश्य उन स्वदेशी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करना है जो एएमसीए प्रोजेक्ट के विकास, प्रोटोटाइप निर्माण, फ्लाइट टेस्टिंग सपोर्ट और सर्टिफिकेशन के लिए तकनीकी रूप से सक्षम हों। भारतीय कानून और नियमों के तहत आने वाली सिंगल कंपनी, जॉइंट वेंचर या कंपनियों के कंसोर्टियम इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
अमेरिका, रूस और चीन के बाद अब पाकिस्तान को भी चीन पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान देने की तैयारी में है। ऐसे में भारत ने भी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट निर्माण की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। डिजाइनिंग का अहम चरण पहले ही पूरा किया जा चुका है, जो किसी भी हथियार प्रणाली के विकास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
भारत ने स्वदेशी तकनीक से तेजस फाइटर जेट बनाकर एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर लिया है और अब भविष्य के हाईटेक स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस जेट की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह भारत का पहला स्वदेशी दो इंजन वाला फाइटर जेट होगा। इसका डिजाइन ऐसा तैयार किया जा रहा है कि दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे। यह विमान करीब 10 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकेगा, और लंबी उड़ान के दौरान पायलटों को सुविधा देने के लिए इसमें कई विशेष बदलाव किए जाएंगे।
इसके अलावा इस स्टील्थ जेट में हथियारों और मिसाइलों के लिए विशेष आंतरिक व्यवस्था होगी। आमतौर पर फाइटर जेट्स में मिसाइलें और हथियार विंग्स या विमान के नीचे लगे होते हैं, जिन्हें दुश्मन के रडार आसानी से पहचान लेते हैं, लेकिन एएमसीए में हथियारों को विमान के अंदरूनी हिस्से में रखा जाएगा, जिससे इसकी स्टील्थ क्षमता और बढ़ जाएगी।
इस एयरक्राफ्ट को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा दे सके। यह फाइटर 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा।
फिलहाल सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भारतीय वायुसेना 42 फाइटर स्क्वाड्रन की आवश्यकता के मुकाबले केवल 29 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है। इस संख्या को 29 से 42 तक पहुंचाने में समय लगेगा। भारतीय वायुसेना की कोशिश है कि अधिक से अधिक एयरक्राफ्ट स्वदेशी हों, जिसमें एलसीए एमके-1ए, एलसीए एमके-2 और एएमसीए अहम भूमिका निभाएंगे।
--आईएएनएस
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