3 एक्सप्रेसवे, 7 राज्य और सुपरफास्ट कनेक्टिविटी! जानिए कैसे एक-दूसरे से जुड़ेंगे जयपुर, आगरा और प्रयागराज
देश में तेजी से नए एक्सप्रेसवे और हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का फोकस सिर्फ नए सड़क मार्ग बनाने पर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने पर भी है। इससे राज्यों और प्रमुख शहरों के बीच सफर आसान होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी कम करने में मदद मिलेगी।
ऐसा ही एक बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर तैयार किया जा रहा है। इन एक्सप्रेसवे को लिंक कॉरिडोर के जरिए जोड़ने के बाद दिल्ली, जयपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों से आगरा, लखनऊ और प्रयागराज तक की कनेक्टिविटी पहले से काफी बेहतर हो सकती है।
इस पूरे नेटवर्क का फायदा करीब 7 राज्यों को मिलने की उम्मीद है।
कैसे जुड़ेंगे तीनों एक्सप्रेसवे?
इस महाकनेक्टिविटी नेटवर्क को तैयार करने के लिए दो अहम लिंक कॉरिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
1. गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे
करीब 75 किलोमीटर लंबा गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर के सियाना क्षेत्र के पास गंगा एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम करेगा।
यह लिंक जेवर और बुलंदशहर के रास्ते दोनों एक्सप्रेसवे को आपस में कनेक्ट करेगा। इसके तैयार होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ से आने वाले वाहनों को दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर जाने के लिए बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
2. जेवर-बल्लभगढ़ लिंक कॉरिडोर
दूसरा महत्वपूर्ण लिंक जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह कनेक्टिविटी यमुना एक्सप्रेसवे से जेवर, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ होते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंच बनाएगी। इससे जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बीच भी सीधा कनेक्शन मजबूत होगा।
किन 7 राज्यों को मिलेगा फायदा?
इस एक्सप्रेसवे ग्रिड का असर सिर्फ दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए कई राज्यों के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
दिल्ली-NCR
दिल्ली-एनसीआर को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है। यूपी, राजस्थान और पंजाब की तरफ से आने वाले वाहनों को कई जगहों पर दिल्ली के अंदर प्रवेश किए बिना बाईपास रूट मिलने की संभावना है।
यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए नोएडा और जेवर की कनेक्टिविटी भी इस नेटवर्क का अहम हिस्सा होगी।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश इस पूरे नेटवर्क के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हो सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज, रायबरेली और पूर्वी यूपी के अन्य शहर पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जुड़ पाएंगे।
इसके अलावा राजस्थान और गुजरात की तरफ जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
हरियाणा
जेवर-बल्लभगढ़ लिंक के जरिए फरीदाबाद और बल्लभगढ़ क्षेत्र को जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्शन मिलेगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी फायदा हो सकता है।
राजस्थान
राजस्थान के जयपुर और दौसा जैसे शहरों को उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों तक तेज सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। खासकर जयपुर से आगरा और आगे यूपी के दूसरे हिस्सों तक पहुंच आसान हो सकती है।
मध्य प्रदेश
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है। ऐसे में इस नेटवर्क के विस्तार से रतलाम समेत मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों को दूसरे राज्यों से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
गुजरात
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए गुजरात के वडोदरा और सूरत जैसे प्रमुख शहर भी इस बड़े सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगे। इससे यात्रियों के अलावा माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए इस नेटवर्क की कनेक्टिविटी आगे महाराष्ट्र तक पहुंचेगी। इससे उत्तर भारत और पश्चिम भारत के बीच सड़क मार्ग से सफर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।
कई रूट पर आधा हो सकता है सफर का समय
इस एक्सप्रेसवे ग्रिड के पूरा होने के बाद कई शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।
दिए गए अनुमान के मुताबिक, प्रयागराज से जेवर या दिल्ली का सफर करीब 11-12 घंटे से घटकर लगभग 5-6 घंटे तक आ सकता है।
वहीं आगरा से जयपुर की यात्रा, जो अभी करीब 5-6 घंटे ले सकती है, बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के बाद लगभग 3 घंटे के आसपास हो सकती है।
इसी तरह प्रयागराज और जयपुर के बीच यात्रा का समय भी काफी कम होने की संभावना है।
हालांकि, वास्तविक यात्रा समय सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, एक्सप्रेसवे के पूरे नेटवर्क के चालू होने और अंतिम रूट पर निर्भर करेगा।
पर्यटन और कारोबार को भी मिलेगा बड़ा फायदा
इस नेटवर्क का फायदा सिर्फ आम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। एक्सप्रेसवे के बेहतर कनेक्शन से पर्यटन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बढ़ावा मिल सकता है।
ब्रज क्षेत्र, आगरा और जयपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों को फायदा होगा। वहीं जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होने के बाद एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच आवाजाही भी आसान हो सकती है।
लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए भी यह नेटवर्क महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि मालवाहक वाहनों को कई बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच तेज और बेहतर सड़क मार्ग मिल सकेगा।
क्या बदलेगा?
गंगा, यमुना और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला यह नेटवर्क पूरा होने के बाद उत्तर भारत से पश्चिमी भारत तक सड़क कनेक्टिविटी का एक बड़ा कॉरिडोर तैयार हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेसवे ग्रिड दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के बीच यात्रा और माल ढुलाई को आसान बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। इससे कई प्रमुख शहरों के बीच दूरी कम नहीं होगी, लेकिन सफर का समय और रास्ते की परेशानी जरूर कम होने की उम्मीद है।

