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25 अक्टूबर का पंचांग: पश्चिम दिशा में यात्रा करना पड़ सकता है भारी, शाम 5:21 बजे तक रहेगा हर्षण योग

25 अक्टूबर का पंचांग: पश्चिम दिशा में यात्रा करना पड़ सकता है भारी, शाम 5:21 बजे तक रहेगा हर्षण योग
25 अक्टूबर का पंचांग: पश्चिम दिशा में यात्रा करना पड़ सकता है भारी, शाम 5:21 बजे तक रहेगा हर्षण योग

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

25 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:56 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। रविवार को सुबह 6:32 बजे सूर्योदय और शाम 5:49 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 5:08 बजे चंद्रोदय और सुबह 6:25 बजे चंद्रास्त होगा।

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है।

रविवार शाम 5:21 बजे तक हर्षण योग रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, हर्षण योग 27 नित्य (नैसर्गिक) योगों में से 14वें क्रम का एक बेहद शुभ योग माना जाता है। 'हर्षण' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'खुशी', 'आनंद', 'रोमांच' या 'उत्साह' होता है। इस योग के अधिष्ठाता देवता भग (सौभाग्य और धन के देवता) और सूर्य माने गए हैं। इस योग में जन्मे लोग अत्यंत हंसमुख, मिलनसार, सकारात्मक और ऊर्जावान होते हैं।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।

रविवार को शाम 5:03 से 6:34 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन राहुकाल शाम 4:24 बजे से 5:49 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।

रविवार को यमगंड काल दोपहर 12:10 से 1:35 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।

इस दिन गुलिक काल दोपहर 3:00 बजे से 4:24 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना, या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।

रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ स्थिति कहा जाता है। सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है। सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है। इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

इस दिन चंद्र देव मीन राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा के मीन राशि में होने या गोचर करने से व्यक्ति के स्वभाव, रिश्तों और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति का स्वभाव बहुत कोमल, मिलनसार और परोपकारी होता है। वे दूसरों के दुख-दर्द को आसानी से समझ लेते हैं और मदद के लिए आगे रहते हैं। देवगुरु बृहस्पति की राशि होने के कारण ईश्वर, पूजा-पाठ, ध्यान और रहस्यवादी विषयों में इनकी गहरी रुचि होती है।

रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम

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