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200 करोड़ रुपए की रंगदारी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। 200 करोड़ रुपए की रंगदारी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना पॉलोज को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने रुपए रुपये की रंगदारी, धोखाधड़ी, और संगठित अपराध से जुड़े मामले में सुकेश चंद्रशेखर और लीना समेत 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। मामला कथित तौर पर जेल के भीतर से संचालित किए जा रहे एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है।
200 करोड़ रुपए की रंगदारी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। 200 करोड़ रुपए की रंगदारी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना पॉलोज को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने रुपए रुपये की रंगदारी, धोखाधड़ी, और संगठित अपराध से जुड़े मामले में सुकेश चंद्रशेखर और लीना समेत 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। मामला कथित तौर पर जेल के भीतर से संचालित किए जा रहे एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है।

दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग के एडिशनल कमिश्नर रवि कुमार सिंह के अनुसार, इस अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल मामले में मकोका के तहत आरोप तय किया जाना एक बड़ा मील का पत्थर है और यह जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों की मजबूती को दर्शाता है। इस चरण का सफल समापन पिछले चार वर्षों में आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के सूक्ष्म, पेशेवर और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

जांच में भारी मात्रा में रिकॉर्ड की गहन जांच, वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण, कई गवाहों की जांच, तकनीकी और दस्तावेजी सबूतों का संग्रह, और कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूतों के माध्यम से आरोपियों की संगठित आपराधिक गतिविधियों को स्थापित करना शामिल था।

जांच से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष सराहना की जानी चाहिए, जिन्होंने सबूतों की कड़ी स्थापित करने, आरोपियों की विशिष्ट भूमिकाओं की पहचान करने और आपराधिक साजिश के हर पहलू की व्यापक जांच सुनिश्चित करने में अथक परिश्रम किया। ऐसे जटिल मामले में एक विस्तृत आरोप पत्र तैयार करने और दाखिल करने के लिए असाधारण समर्पण, पेशेवर दक्षता और दृढ़ता की आवश्यकता थी।

जांच में कई अहम सबूत सामने आए, जिनमें गवाहों के बयान, मकोका के तहत दर्ज किए गए कबूलनामे, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, वॉयस रिकॉर्डिंग, फोरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, अपराधों को अंजाम देने में इस्तेमाल हुए मोबाइल फोन की बरामदगी, हवाला लेन-देन के सुराग और अपराध से कमाए गए पैसों से खरीदी गई लग्जरी गाड़ियां और दूसरी संपत्तियों की बरामदगी शामिल है।

ईओडब्ल्यू के सीनियर अधिकारियों की देखरेख में, आईओ-एसीपी वीरेंद्र कादियान और इंस्पेक्टर प्रदीप राय की एक खास 'पैरवी टीम' ने ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट, दोनों के सामने इस मामले को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाया। राज्य की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अखंड प्रताप सिंह ने पैरवी की। टीम नियमित रूप से कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुई और सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं और उन पर आरोप तय करने से जुड़ी बहसों में मदद की।

इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) संगठित आर्थिक अपराधों, जबरन वसूली के रैकेट और आपराधिक साजिशों से लड़ने के अपने पक्के इरादे को दोहराता है। इस मामले में सफल जांच और उसके बाद आरोप तय होना, दिल्ली पुलिस के उस पेशेवर रवैये, लगन और दृढ़ संकल्प का सबूत है, जिसके तहत वह संगठित आपराधिक नेटवर्क को खत्म करती है, फिर चाहे उन नेटवर्क का कितना भी असर हो, उनके पास कितने भी संसाधन हों या वे कहीं से भी काम करते हों।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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