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राष्ट्रीय पोषण माह 2026: एमडीएनआईवाई में आहार विविधता और पर्याप्त

राष्ट्रीय पोषण माह 2026: एमडीएनआईवाई में आहार विविधता और पर्याप्त
राष्ट्रीय पोषण माह 2026: एमडीएनआईवाई में आहार विविधता और पर्याप्त

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने नौवें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें आहार विविधता, खान-पान की स्वस्थ आदतों और पर्याप्त प्रोटीन सेवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आहार संबंधी जानकारीपूर्ण विकल्पों और पर्याप्त पोषण पर जोर देना था।

कार्यक्रम के दौरान एमडीएनआईवाई की निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) और कार्यक्रम की मुख्य संरक्षक डॉ. ज्योति केसवानी के नेतृत्व में पोषण की शपथ दिलाई गई। डॉ. केसवानी ने पौष्टिक आहार और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला।

आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर निवारण एवं अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईसीपीआर) की वैज्ञानिक 'डी' डॉ. स्वाति जैन ने ‘आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन’ विषय पर एक ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संतुलित और विविध आहार के एक भाग के रूप में पर्याप्त प्रोटीन की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए।

डॉ. जैन ने ऊतकों की मरम्मत, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मांसपेशियों के रखरखाव और एंजाइमों एवं हार्मोनों के उत्पादन में प्रोटीन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने भारतीय पोषण आवश्यकताओं के लिए आईसीएमआर-एनआईएन दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि स्वस्थ वयस्कों के लिए सुरक्षित प्रोटीन सेवन की मात्रा उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीनयुक्त आहार के लिए प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से 0.83 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि कम गुणवत्ता वाले अनाज आधारित आहार के लिए यह मात्रा प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से 1.0 ग्राम प्रतिदिन है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रोटीन की आवश्यकता उम्र, शरीर के आकार, मनोवैज्ञानिक स्थिति, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है।

डॉ. जैन ने आहार में विविधता पर जोर देते हुए अनाज के साथ-साथ दालें, दूध, सोया, मेवे और बीज शामिल करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने दाल-चावल, रोटी-चना, इडली-सांभर, डोसा-सांभर और खिचड़ी जैसे पारंपरिक खाद्य संयोजनों को पूरक प्रोटीन स्रोतों के व्यावहारिक उदाहरण के रूप में उद्धृत किया। उन्होंने सत्तू, दाल, भुना हुआ चना, मूंगफली और सोया जैसे किफायती प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. जैन ने बताया कि प्रोटीन का सेवन एक ही भोजन में केंद्रित करने की बजाय पूरे भोजन में विभाजित करके करना चाहिए। उन्‍होंने योग का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों के लिए इस बात पर जोर दिया कि व्यायाम के बाद के 'प्रोटीन विंडो’ पर विशेष ध्यान देने की बजाय समग्र दैनिक प्रोटीन सेवन और संतुलित आहार अधिक महत्वपूर्ण हैं।

इस कार्यक्रम का समन्वय एमडीएनआईवाई में सहायक प्रोफेसर (बायोकेमिस्ट्री) डॉ. खुशबू जैन द्वारा किया गया और इसका संचालन सहायक प्रोफेसर (योग शिक्षा) डॉ. पवन कुमार द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में एमडीएनआईवाई के संचार एवं प्रलेखन अधिकारी और उप निदेशक (प्रभारी) मोहम्मद तैयब आलम, कार्यक्रम अधिकारी (योग चिकित्सा) डॉ. आईएन आचार्य, संकाय सदस्य, छात्र, अधिकारी और संस्थान के कर्मचारी उपस्थित थे।

माह भर चलने वाले इस आयोजन के अंतर्गत एमडीएनआईवाई पोषण प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता, स्कूली बच्चों के लिए पोषण जागरूकता कार्यक्रम और मातृ पोषण तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम सहित कई जागरूकता, शैक्षिक और जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन करेगा। यह आयोजन 8 अक्टूबर 2026 को एक समापन कार्यक्रम के साथ समाप्त होगा, जिसमें पोस्टर प्रदर्शनी, प्रतिभागियों का सम्मान और आयुर्वेदिक पोषण तथा स्वस्थ आहार संबंधी प्रणालियों पर जागरूकता सत्र शामिल होंगे।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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